Chapter 4: Carbon and Its Compounds (कार्बन एवं इसके यौगिक) - सम्पूर्ण रिवीजन नोट्स
1. Carbon का सामान्य परिचय (Introduction to Carbon)
कार्बन एक अत्यंत महत्वपूर्ण अधातु (Non-metal) तत्व है। यह आवर्त सारणी (Periodic Table) के वर्ग 14 (Group 14) तथा आवर्त 2 (Period 2) में स्थित है। इसका नाम लैटिन शब्द 'Carbo' से लिया गया है, जिसका अर्थ 'कोयला' होता है।
- रासायनिक प्रतीक (Symbol): C
- परमाणु संख्या (Atomic Number): 6
- द्रव्यमान संख्या (Atomic Mass): 12 u
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration): K = 2, L = 4
- संयोजकता (Valency): 4 (चतुःसंयोजी / Tetravalent)
- भूपर्पटी (Earth's Crust): भूपर्पटी में खनिजों (जैसे कार्बोनेट, हाइड्रोजन कार्बोनेट, कोयला, पेट्रोलियम) के रूप में केवल 0.02% कार्बन पाया जाता है।
- वायुमंडल (Atmosphere): वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के रूप में केवल 0.03% कार्बन उपस्थित है।
2. कार्बन में आबंधन: सहसंयोजी आबंध (Covalent Bonding in Carbon)
किसी भी तत्व की रासायनिक अभिक्रियाशीलता उसके बाह्यतम कोश को पूर्ण करने अर्थात् उत्कृष्ट गैस विन्यास (Noble Gas Configuration) प्राप्त करने की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। कार्बन के बाह्यतम कोश (L-shell) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अष्टक पूरा करने के लिए इसे 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने या त्यागने की आवश्यकता होती है।
कार्बन आयनिक आबंध (Ionic Bond) क्यों नहीं बनाता?
- यदि कार्बन 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके C4- ऋणायन बनाए: तो 6 प्रोटॉन वाले कार्बन के नाभिक के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों (6 मूल + 4 अतिरिक्त) को धारण करना अत्यंत कठिन हो जाएगा। यह संरचनात्मक रूप से अत्यधिक अस्थाई होगा।
- यदि कार्बन 4 इलेक्ट्रॉन त्यागकर C4+ धनायन बनाए: तो 4 इलेक्ट्रॉनों को बाहर निकालने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा (Ionization Energy) की आवश्यकता होगी, तथा 6 प्रोटॉन वाले नाभिक में केवल 2 इलेक्ट्रॉन रह जाएंगे, जो भी संभव नहीं है।
सहसंयोजी आबंध के प्रकार (Types of Covalent Bonds)
| प्रकार (Type) | इलेक्ट्रॉन साझेदारी | प्रतीक | उदाहरणीय अणु (Examples) |
|---|---|---|---|
| 1. एक आबंध (Single Covalent Bond) | 1-1 इलेक्ट्रॉन (1 युग्म) | − | हाइड्रोजन (H₂), मेथेन (CH₄), जल (H₂O), क्लोरीन (Cl₂) |
| 2. द्वि-आबंध (Double Covalent Bond) | 2-2 इलेक्ट्रॉन (2 युग्म) | = | ऑक्सीजन (O₂), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), एथीन (C₂H₄) |
| 3. त्रि-आबंध (Triple Covalent Bond) | 3-3 इलेक्ट्रॉन (3 युग्म) | ≡ | नाइट्रोजन (N₂), एथाइन (C₂H₂) |
सहसंयोजी यौगिकों के सामान्य गुणधर्म (Properties of Covalent Compounds)
- कम गलनांक एवं क्वथनांक (Low Melting & Boiling Points): इनके अणुओं के बीच अंतर-आणविक बल (Intermolecular Force) बहुत कमजोर होता है। अतः इन्हें तोड़ने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- विद्युत के कुचालक (Poor Conductors of Electricity): सहसंयोजी आबंध में इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी होती है और कोई मुक्त आयन (Free Ions) या मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं बनते, इसलिए ये सामान्यतः विद्युत के कुचालक होते हैं।
- घुलनशीलता (Solubility): ये सामान्यतः जल (ध्रुवीय विलायक) में अघुलनशील होते हैं, परंतु कार्बनिक विलायकों (जैसे अल्कोहल, ईथर, बेंजीन) में घुलनशील होते हैं।
3. कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति (Versatile Nature of Carbon)
वर्तमान में ज्ञात कार्बनिक यौगिकों की संख्या लगभग 3 मिलियन (30 लाख) से भी अधिक है। कार्बन द्वारा इतने अधिक यौगिक बनाने की क्षमता के निम्नलिखित मुख्य कारण हैं:
1. श्रृंखलन का गुण (Catenation Property)
कार्बन में कार्बन के ही अन्य परमाणुओं के साथ सहसंयोजी आबंध बनाकर सीधी श्रृंखला (Straight Chain), शाखित श्रृंखला (Branched Chain) या वलय (Closed Ring) बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है। इसे श्रृंखलन कहते हैं। कार्बन-कार्बन आबंध अत्यधिक मजबूत और स्थाई होता है।
2. चतुःसंयोजकता (Tetravalency)
कार्बन की संयोजकता 4 होती है। इसलिए इसमें कार्बन के चार अन्य परमाणुओं अथवा अन्य एक-संयोजी तत्वों (जैसे हाइड्रोजन, क्लोरीन) या बहु-संयोजी तत्वों (जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन) के परमाणुओं के साथ आबंध बनाने की क्षमता होती है।
3. छोटा आकार (Small Atomic Size)
कार्बन परमाणु का आकार छोटा होने के कारण इसका नाभिक साझा किए गए इलेक्ट्रॉन युग्मों को मजबूती से पकड़े रहता है। इसके परिणामस्वरूप कार्बन द्वारा बनाए गए आबंध अत्यधिक मजबूत और स्थाई (Stable) होते हैं।
4. समावयवता (Isomerism)
समान अणुसूत्र परंतु भिन्न संरचनात्मक सूत्र दर्शाने की क्षमता भी कार्बनिक यौगिकों की विशाल संख्या के लिए उत्तरदायी है।
4. कार्बन के अपररूप (Allotropes of Carbon)
जब कोई तत्व प्रकृति में विभिन्न भौतिक रूपों में पाया जाता है, जबकि उनके रासायनिक गुण समान होते हैं, तो उन्हें अपररूप (Allotropes) कहते हैं। कार्बन के तीन मुख्य क्रिस्टलीय अपररूप हैं:
| गुणधर्म (Property) | हीरा (Diamond) | ग्रेफाइट (Graphite) | बकमिनस्टर फुलेरीन (C₆₀) |
|---|---|---|---|
| संरचना (Structure) | प्रत्येक C परमाणु 4 अन्य C परमाणुओं से जुड़कर दृढ त्रिविमीय (3D) संरचना बनाता है। | प्रत्येक C परमाणु 3 अन्य C परमाणुओं से जुड़कर षट्कोणीय (Hexagonal) परतीय संरचना बनाता है। | 60 कार्बन परमाणु आपस में जुड़कर फुटबॉल जैसी गुंबदाकार संरचना (Geodesic Dome) बनाते हैं। |
| कठोरता एवं रूप | प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला सबसे कठोरतम पदार्थ। पारदर्शी। | चिकना, फिसलनदार और नरम (Soft) पदार्थ। अपारदर्शी धूसर। | यह एक सुंदर गोल अणु वाला ठोस अपररूप है। |
| विद्युत चालकता | विद्युत का कुचालक (सभी 4 इलेक्ट्रॉन आबंधित होते हैं)। | विद्युत का सुचालक (Good Conductor) (1 इलेक्ट्रॉन मुक्त रहता है)। | सामान्य ताप पर कुचालक / अर्धचालक। |
| मुख्य उपयोग | कांच काटने के औजार, पत्थरों में ड्रिलिंग, आभूषण बनाने में। | पेंसिल लेड, मशीनों में शुष्क स्नेहक (Dry Lubricant), इलेक्ट्रोड बनाने में। | नैनो-टेक्नोलॉजी और औषधीय वाहक (Drug Delivery) के शोध में। |
5. हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons)
केवल कार्बन (C) तथा हाइड्रोजन (H) के संयोग से बने यौगिकों को हाइड्रोकार्बन कहते हैं। उदाहरण: मेथेन (CH₄), एथेन (C₂H₆), एथीन (C₂H₄), एथाइन (C₂H₂)।
A. संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated Hydrocarbons - Alkane)
वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल सहसंयोजी आबंध (−) होता है, उन्हें संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहते हैं। इन्हें एल्केन (Alkane) कहा जाता है।
- सामान्य सूत्र (General Formula): CnH2n+2 (जहाँ n = 1, 2, 3...)
- उदाहरण: CH₄ (Methane), C₂H₆ (Ethane), C₃H₈ (Propane)
B. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated Hydrocarbons)
वे हाइड्रोकार्बन जिनमें दो कार्बन परमाणुओं के मध्य कम से कम एक द्वि-आबंध (=) या त्रि-आबंध (≡) उपस्थित होता है, उन्हें असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहते हैं:
- एल्कीन (Alkene): कार्बन-कार्बन के बीच द्वि-आबंध (=)। सामान्य सूत्र: CnH2n (उदा. C₂H₄ - Ethene)।
- एल्काइन (Alkyne): कार्बन-कार्बन के बीच त्रि-आबंध (≡)। सामान्य सूत्र: CnH2n-2 (उदा. C₂H₂ - Ethyne)।
6. समावयवता (Isomerism)
ऐसे यौगिक जिनके अणुसूत्र (Molecular Formula) समान होते हैं, परंतु उनके संरचनात्मक सूत्र (Structural Formula) भिन्न-भिन्न होते हैं, उन्हें समावयवी (Isomers) कहते हैं तथा इस परिघटना को संरचनात्मक समावयवता (Structural Isomerism) कहते हैं।
ब्यूटेन के दो समावयवी संभव हैं:
- नॉर्मल-ब्यूटेन (n-Butane): CH₃ − CH₂ − CH₂ − CH₃
- आइसो-ब्यूटेन (Iso-Butane / 2-Methylpropane): CH₃ − CH(CH₃) − CH₃
7. प्रकार्यात्मक समूह एवं समजातीय श्रेणी
प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group)
परमाणुओं का वह समूह जो कार्बनिक यौगिक की हाइड्रोकार्बन श्रृंखला में हाइड्रोजन को प्रतिस्थापित करता है और यौगिक को विशिष्ट रासायनिक गुण प्रदान करता है, उसे प्रकार्यात्मक समूह कहते हैं।
| प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group) | सूत्र (Formula) | अनुलग्न (Suffix) | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| हेलो समूह (Halo) | −Cl, −Br, −I | Chloro-, Bromo- | Chloromethane (CH₃Cl) |
| ऐल्कोहॉल (Alcohol) | −OH | -ol (ऑल) | Ethanol (C₂H₅OH) |
| ऐल्डिहाइड (Aldehyde) | −CHO | -al (अल) | Ethanal (CH₃CHO) |
| कीटोन (Ketone) | >C=O | -one (ओन) | Propanone (CH₃COCH₃) |
| कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acid) | −COOH | -oic acid (ओइक अम्ल) | Ethanoic acid (CH₃COOH) |
समजातीय श्रेणी (Homologous Series)
यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें समान प्रकार्यात्मक समूह उपस्थित होता है तथा जिसके आधार पर रासायनिक गुणों में समानता पाई जाती है, उसे समजातीय श्रेणी कहते हैं। (उदा. CH₄, C₂H₆, C₃H₈)। दो क्रमागत सदस्यों के बीच −CH₂− का अंतर तथा 14 u आणविक द्रव्यमान का अंतर होता है।
8. कार्बनिक यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म (Chemical Properties)
1. दहन अभिक्रिया (Combustion Reaction)
2. ऑक्सीकरण अभिक्रिया (Oxidation Reaction)
3. संकलन / योगशील अभिक्रिया (Addition Reaction)
औद्योगिक उपयोग: वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण द्वारा वनस्पति घी (Dalda) बनाने में।
4. प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction)
9. महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिक: एथेनॉल एवं एथेनॉइक अम्ल
A. एथेनॉल (Ethanol - C₂H₅OH)
- सोडियम के साथ अभिक्रिया: 2C₂H₅OH + 2Na → 2C₂H₅ONa + H₂↑
- निर्जलीकरण (Dehydration): CH₃CH₂OH &xrightarrow{\text{Conc. H}_2\text{SO}_4, 443\text{K}} CH₂=CH₂ + H₂O
B. एथेनॉइक अम्ल (Ethanoic Acid - CH₃COOH)
- सिरका (Vinegar): जल में एसिटिक एसिड का 3-5% घोल सिरका कहलाता है।
- ग्लेशियर एसिटिक एसिड: शुद्ध एथेनॉइक अम्ल का गलनांक 290 K (17°C) होता है, जिससे यह ठंडे मौसम में जम जाता है।
- एस्टरीकरण अभिक्रिया (Esterification Reaction): CH₃COOH + C₂H₅OH &xrightarrow{\text{Acid}} CH₃COOC₂H₅ + H₂O
- साबुनीकरण (Saponification): CH₃COOC₂H₅ + NaOH → CH₃COONa + C₂H₅OH
10. साबुन एवं अपमार्जक (Soaps and Detergents)
| गुणधर्म | साबुन (Soap) | अपमार्जक / डिटर्जेंट (Detergent) |
|---|---|---|
| रासायनिक संगठन | उच्च वसीय अम्लों के Sodium/Potassium लवण। | सल्फोनिक अम्लों के अमोनियम/सोडियम लवण। |
| कठोर जल में कार्य | कठोर जल में झाग नहीं देता (Scum बनाता है)। | मृदु एवं कठोर दोनों जल में प्रभावी। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | जैव-निम्नीकरणीय (Biodegradable) है। | अजैव-निम्नीकरणीय (Non-biodegradable) है। |
मिसेल का निर्माण (Micelle Formation)
साबुन के अणु में दो सिरे होते हैं: जलरागी सिरा (Hydrophilic Head) जो जल में घुलनशील है, और जलविरागी सिरा (Hydrophobic Tail) जो तैल/ग्रीस में घुलनशील है। पानी में घोलने पर यह अणुओं का एक गुच्छा बनाता है जिसे मिसेल (Micelle) कहते हैं, जो मैल को खींचकर पानी के साथ बाहर निकाल देता है।
11. बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (VVI Board Questions)
प्रश्न 1: समजातीय श्रेणी क्या है? उदाहरण दें।
उत्तर: कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसके सभी सदस्यों में समान प्रकार्यात्मक समूह होता है और दो क्रमागत सदस्यों के बीच −CH₂− इकाई का अंतर होता है। उदा. मेथेन (CH₄), एथेन (C₂H₆)।
प्रश्न 2: एस्टरीकरण और साबुनीकरण में क्या अंतर है?
उत्तर: कार्बोक्सिलिक अम्ल और अल्कोहल की अभिक्रिया से एस्टर बनना एस्टरीकरण है, जबकि एस्टर की क्षार (NaOH) के साथ अभिक्रिया से साबुन का बनना साबुनीकरण है।
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