Class 11 Geography Chapter 4 Notes: महासागरों और महाद्वीपों का वितरण
1. प्रस्तावना (Introduction)
अगर हम विश्व के मानचित्र (World Map) को ध्यान से देखें, तो ऐसा लगता है कि दक्षिण अमेरिका का पूर्वी तट और अफ्रीका का पश्चिमी तट एक-दूसरे में बिल्कुल फिट बैठ सकते हैं, जैसे किसी पहेली (Jigsaw Puzzle) के दो टुकड़े। पृथ्वी की सतह पर लगभग 29% भाग महाद्वीप (Continents) हैं और 71% भाग महासागर (Oceans) हैं।
क्या ये महाद्वीप और महासागर हमेशा से ऐसे ही थे जैसा आज हम देखते हैं? भूगोलवेत्ताओं का मानना है कि महाद्वीपों की स्थिति हमेशा स्थिर नहीं रही है, बल्कि ये समय के साथ गति करते रहे हैं। इस अध्याय में हम यही समझेंगे कि महाद्वीप और महासागर वर्तमान स्वरूप में कैसे आए।
2. महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (Continental Drift Theory)
जर्मन मौसमविद और भू-शास्त्रज्ञ अल्फ़्रेड वेगनर (Alfred Wegener) ने वर्ष 1912 में महाद्वीपीय विस्थापन का सिद्धांत प्रस्तुत किया।
(A) पेंजिया और पैंथालासा (Pangaea & Panthalassa)
- पेंजिया (Pangaea): वेगनर के अनुसार, लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी के सभी महाद्वीप आपस में जुड़े हुए थे और एक विशाल महाद्वीप के रूप में थे, जिसे 'पेंजिया' (जिसका अर्थ है संपूर्ण पृथ्वी) कहा गया।
- पैंथालासा (Panthalassa): इस विशाल महाद्वीप के चारों ओर एक विशाल महासागर फैला हुआ था, जिसे 'पैंथालासा' (जिसका अर्थ है जल ही जल) कहा गया।
- टेथिस सागर (Tethys Sea): लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले पेंजिया दो बड़े महाद्वीपीय खंडों में टूट गया—उत्तरी खंड लॉरेशिया (Laurasia / अंगारालैंड) और दक्षिणी खंड गोंडवानालैंड (Gondwanaland)। इन दोनों खंडों के बीच एक संकरा सागर बना जिसे 'टेथिस सागर' कहा गया।
(B) महाद्वीपीय विस्थापन के पक्ष में प्रमाण (Evidences in Support)
- महाद्वीपों में साम्य (Jigsaw Fit): दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के आमने-सामने के तटों की रेखाओं में अद्भुत समानता है। यदि इन्हें मिलाया जाए तो ये एक-दूसरे में आसानी से फिट हो जाते हैं।
- महासागरों के पार चट्टानों की आयु में समानता: ब्राजील के तट की चट्टानों और पश्चिमी अफ्रीका के तट की चट्टानों की आयु रेडियोमीट्रिक डेटिंग (200 करोड़ वर्ष पुरानी) से एक समान पाई गई है।
- टिलाइट (Tillite): यह हिमानी (Glacier) के निक्षेप से बनी अवसादी चट्टानें हैं। गोंडवानालैंड के 6 महाद्वीपीय खंडों (भारत, अफ्रीका, मेडागास्कर, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका) में एक ही प्रकार के टिलाइट निक्षेप मिलते हैं।
- प्लेसर निक्षेप (Placer Deposits): घाना (पश्चिम अफ्रीका) के तट पर सोने के समृद्ध निक्षेप मिलते हैं, लेकिन वहाँ सोना उत्पन्न करने वाली चट्टानें नहीं हैं। ये चट्टानें ब्राजील में मिलती हैं, जिससे सिद्ध होता है कि दोनों तट कभी जुड़े हुए थे।
- जीवाश्मों का वितरण (Distribution of Fossils):
- लेमूर (Lemur): इनके अवशेष भारत, मेडागास्कर और अफ्रीका में मिलते हैं।
- मेसोसॉरस (Mesosaurus): यह छोटे मीठे पानी का सरीसृप था, जिसके कंकाल केवल दक्षिणी अफ्रीका और ब्राजील की चट्टानों में मिलते हैं।
(C) विस्थापन के लिए बल (Forces for Drifting)
वेगनर के अनुसार महाद्वीपों के खिसकने के मुख्य रूप से दो बल उत्तरदायी थे:
- पोलर या ध्रुवीय फलीइंग बल (Polar-fleeing Force): यह पृथ्वी के घूर्णन (Rotation) से उत्पन्न होता है।
- ज्वारीय बल (Tidal Force): यह सूर्य और चंद्रमा के आकर्षण बल से जुड़ा है, जिससे महासागरों में ज्वार आते हैं।
3. संवहन धारा सिद्धांत (Convection Current Theory)
1930 के दशक में आर्थर होम्स (Arthur Holmes) ने संवहन धारा सिद्धांत प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मेंटल (Mantle) भाग में तापीय अंतर के कारण रेडियोएक्टिव तत्वों से ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे संवहन धाराएं चलती हैं जो महाद्वीपों को गति देने में ऊर्जा प्रदान करती हैं।
4. महासागरीय अधस्तल की बनावट एवं विस्तार
महासागरीय अधस्तल के मुख्य भाग:
| भाग का नाम | विशेषताएँ एवं संरचना |
|---|---|
| महाद्वीपीय सीमा (Continental Margins) | इसमें महाद्वीपीय मग्नतट, मग्नढाल और महासागरीय गर्त (Trenches) शामिल हैं। |
| वितलीय मैदान (Abyssal Plains) | ये महाद्वीपीय सीमा और मध्य-महासागरीय कटकों के बीच फैले समतल मैदान हैं। |
| मध्य-महासागरीय कटक (Mid-Oceanic Ridges) | यह आपस में जुड़े पहाड़ों की लंबी श्रृंखला है जहाँ लगातार ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं। |
समुद्र तल विस्तार सिद्धांत (Sea Floor Spreading)
1961 में हैरिस हैस (Harry Hess) ने यह सिद्धांत दिया। उन्होंने बताया कि मध्य-महासागरीय कटक से लगातार लावा बाहर निकलता है और महासागरीय पपड़ी को दोनों तरफ धकेलता है, जिससे समुद्र तल का विस्तार होता है।
5. प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत (Plate Tectonics Theory)
1967 में मैकेंजी, पार्कर और मोर्गन ने मिलकर यह सिद्धांत प्रस्तुत किया। स्थलमंडल का विशाल, ठोस टुकड़ा जो महाद्वीपीय और महासागरीय भूपर्पटी से मिलकर बना है, प्लेट कहलाता है।
7 मुख्य (बड़ी) प्लेटें:
- अंटार्कटिक प्लेट
- उत्तर अमेरिकी प्लेट
- दक्षिण अमेरिकी प्लेट
- प्रशांत महासागरीय प्लेट
- इंडो-ऑस्ट्रेलियन-न्यूजीलैंड प्लेट
- अफ्रीकी प्लेट
- यूरेशियाई प्लेट
प्लेट सीमाओं के प्रकार (Types of Plate Boundaries)
- अपसारी सीमा (Divergent Boundary): जब दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर खिसकती हैं (जैसे- मध्य-अटलांटिक कटक)।
- अभिसारी सीमा (Convergent Boundary): जब दो प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं और एक प्लेट नीचे धंस जाती है (जैसे- हिमालय पर्वत)।
- रूपांतर सीमा (Transform Boundary): जब दो प्लेटें एक-दूसरे के साथ क्षैतिज रूप से सरकती हैं।
6. भारतीय प्लेट का संचलन (Indian Plate Movement)
लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले भारतीय प्लेट दक्षिण गोलार्ध में थी। भारत और यूरेशियाई प्लेट के बीच टेथिस सागर था। लगभग 4 से 5 करोड़ वर्ष पहले भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसकी और यूरेशियाई प्लेट से टकराई, जिससे टेथिस सागर की अवसादी चट्टानें मुड़ गईं और हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ।
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