Bihar Board Class 10 Biology Chapter 2 Notes: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination)
बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं के जीव विज्ञान के अध्याय 2 में हम यह समझेंगे कि किस प्रकार पौधे और जंतु अपने पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों के प्रति अनुक्रिया करते हैं तथा शरीर के विभिन्न अंगों का संचालन कैसे करते हैं।
1. नियंत्रण एवं समन्वय क्या है? (What is Control and Coordination?)
जीवों के शरीर में विभिन्न अंगों का एक साथ मिलकर और सुचारू रूप से कार्य करना ताकि शरीर बाहरी वातावरण के परिवर्तनों के प्रति सही अनुक्रिया कर सके, नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) कहलाता है।
उद्दीपन (Stimulus)
पर्यावरण में होने वाले वे परिवर्तन जिनके प्रति जीव अनुक्रिया (Response) करते हैं, उद्दीपन कहलाते हैं। (जैसे: प्रकाश, ऊष्मा, ठंड, ध्वनि, स्पर्श, दर्द आदि)।
जंतुओं में समन्वय के माध्यम
- तंत्रिका तंत्र (Nervous System): विद्युत आवेगों (Electrical Impulses) द्वारा तीव्र नियंत्रण।
- अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System): रासायनिक हार्मोन (Hormones) द्वारा धीमा लेकिन दीर्घकालिक नियंत्रण।
2. जंतुओं में तंत्रिका तंत्र (Nervous System in Animals)
मनुष्य में नियंत्रण एवं समन्वय का मुख्य कार्य तंत्रिका तंत्र और पेशीय ऊतक (Muscular Tissue) द्वारा किया जाता है।
A. तंत्रिका कोशिका या न्यूरॉन (Neuron)
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई (Structural and Functional Unit) है।
न्यूरॉन के मुख्य भाग:
- द्रुमिका (Dendrite): यह सूचनाओं को पर्यावरण से ग्रहण करती है और विद्युत आवेग उत्पन्न करती है।
- कोशिकाकाय (Cell Body / Cyton): यह द्रुमिका द्वारा लाए गए आवेग को संसाधित करता है।
- तंत्रिकाक्ष (Axon): यह सबसे लंबा प्रवर्ध है जो विद्युत आवेग को कोशिकाकाय से आगे की ओर ले जाता है।
- सिनैप्स (Synapse): दो न्यूरॉन के बीच का सूक्ष्म खाली स्थान (Gap) जहाँ विद्युत आवेग रासायनिक संकेतों (Neurotransmitters) में बदलकर अगले न्यूरॉन में स्थानांतरित होता है।
B. प्रतिवर्ती क्रिया और प्रतिवर्ती चाप (Reflex Action and Reflex Arc)
- प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action): किसी उद्दीपन के प्रति शरीर की त्वरित, अनैच्छिक और स्वचालित अनुक्रिया प्रतिवर्ती क्रिया कहलाती है। (उदा. गर्म वस्तु को छूते ही हाथ पीछे खींचना, कांटा चुभने पर पैर हटाना)।
- प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc): प्रतिवर्ती क्रिया के दौरान विद्युत आवेग जिस मार्ग से होकर गुजरता है, उसे प्रतिवर्ती चाप कहते हैं।
मार्ग: ग्राही अंग (Receptor) → संवेदी न्यूरॉन (Sensory Neuron) → मेरुरज्जु (Spinal Cord) → प्रेरक न्यूरॉन (Motor Neuron) → कार्यकर अंग/पेशी (Effector)
3. मानव मस्तिष्क (Human Brain)
मानव मस्तिष्क केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) का मुख्य समन्वयक केंद्र है। यह खोपड़ी (Cranium) के अंदर सुरक्षित रहता है और इसके चारों ओर मेनिंजेस (Meninges) नामक झिल्ली तथा सेरेब्रोस्पाइनल द्रव (CSF) होता है जो झटकों से रक्षा करता है।
मस्तिष्क के मुख्य भाग (Parts of Brain)
| भाग | उप-भाग | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| प्रमस्तिष्क / अग्र-मस्तिष्क (Fore-brain) | सेरेब्रम (Cerebrum) | सोचना, तर्क करना, बुद्धिमत्ता, स्मृति, ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण, भूख/प्यास का ज्ञान। |
| मध्य-मस्तिष्क (Mid-brain) | - | दृष्टि (देखने) और श्रवण (सुनने) की प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण। |
| पश्च-मस्तिष्क (Hind-brain) | 1. अनुमस्तिष्क (Cerebellum) 2. पॉन्स (Pons) 3. मेडुला ऑबलोंगेटा (Medulla Oblongata) |
1. शरीर का संतुलन और मुद्रा (Posture) बनाए रखना। 2. श्वसन दर का नियंत्रण। 3. अनैच्छिक क्रियाओं (रक्तचाप, लार आना, वमन/उल्टी) का नियंत्रण। |
4. पौधों में समन्वय (Coordination in Plants)
पौधों में तंत्रिका तंत्र या मस्तिष्क नहीं होता। वे रासायनिक पदार्थों (पादप हार्मोन) के माध्यम से समन्वय करते हैं।
पौधों में गति (Movements in Plants)
पौधों में गति मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:
1. वृद्धि पर निर्भर गति / अनुवर्तन गति (Tropic Movement)
दिशात्मक गति जो उद्दीपन की दिशा में या उससे दूर होती है:
- प्रकाशानुवर्तन (Phototropism): प्रकाश की ओर गति (उदा. तने का सूर्य के प्रकाश की ओर बढ़ना)।
- गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism): गुरुत्वाकर्षण की दिशा में गति (उदा. जड़ों का नीचे मिट्टी में बढ़ना)।
- रासानुवर्तन (Chemotropism): रसायन के प्रति गति (उदा. परागनली का बीजांड की ओर बढ़ना)।
- जलानावर्तन (Hydrotropism): जल की ओर गति (उदा. जड़ों का नमी की तरफ जाना)।
2. वृद्धि से मुक्त गति / अनुकुंचन गति (Nastic Movement)
अदिशीय गति जो उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं करती (उदा. 'छुई-मुई' (Mimosa pudica) के पौधे की पत्तियों को छूते ही उनका मुड़ जाना या बंद हो जाना)।
पादप हार्मोन / फाइटोहार्मोन (Plant Hormones)
पौधों की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करने वाले रासायनिक पदार्थ:
- ऑक्सिन (Auxin): कोशिका की लंबाई में वृद्धि करता है, प्रकाश की विपरीत दिशा में एकत्र होकर तने को झुकाता है।
- जिब्बेरेलिन (Gibberellin): तने की वृद्धि और बीज अंकुरण में सहायक।
- साइटोकाइनिन (Cytokinin): कोशिका विभाजन (Cell division) को बढ़ावा देता है (फलों और बीजों में अधिक पाया जाता है)।
- एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid): वृद्धि को रोकता है (वृद्धि रोधक हार्मोन), पत्तियों का मुरझाना और झड़ना।
- एथिलीन / एथीन (Ethylene): फलों को पकाने वाला गैसीय हार्मोन।
5. जंतुओं में हार्मोन (Hormones in Animals)
अंतःस्रावी ग्रंथियां (Endocrine Glands) नलिकारहित (Ductless) होती हैं जो सीधे रक्त में अपने स्राव (हार्मोन) को छोड़ती हैं।
मुख्य अंतःस्रावी ग्रंथियां और उनके कार्य:
| ग्रंथि (Gland) | हार्मोन (Hormone) | कार्य / प्रभाव |
|---|---|---|
| पियूष ग्रंथि (Pituitary Gland) | वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone - GH) | शरीर की वृद्धि और विकास का नियंत्रण। (इसे **मास्टर ग्रंथि** भी कहते हैं)। |
| अवटु ग्रंथि (Thyroid Gland) | थायरोक्सिन (Thyroxin) | कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के उपापचय का नियंत्रण। (इसके निर्माण के लिए **आयोडीन** आवश्यक है; कमी से **घेंघा/Goitre** रोग होता है)। |
| अग्न्याशय (Pancreas) | इंसुलिन (Insulin) | रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर को नियंत्रित करता है। (कमी से **मधुमेह/Diabetes** रोग होता है)। |
| अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) | एड्रेनालिन (Adrenaline) | आपातकालीन हार्मोन (Emergency Hormone); हृदय की धड़कन और बीपी बढ़ाकर संकटकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करता है। |
| वृषण (Testis - नर) | टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) | नरों में द्वितीयक लैंगिक लक्षण (दाढ़ी-मूंछ आना, आवाज भारी होना) का विकास। |
| अंडाशय (Ovary - मादा) | एस्ट्रोजन (Estrogen) / प्रोजेस्टेरोन | मादाओं में लैंगिक लक्षणों और मासिक धर्म चक्र का नियंत्रण। |
6. बिहार बोर्ड के लिए अति-महत्वपूर्ण प्रश्न (VVI Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions):
- न्यूरॉन का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाएं।
उत्तर: (परीक्षार्थी इसमें कोशिकाकाय, द्रुमिका, तंत्रिकाक्ष और अंतिम छोर को दर्शाते हुए चित्र अभ्यास करें)। - आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है?
उत्तर: थायरॉयड ग्रंथि को थायरोक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन की आवश्यकता होती है। आयोडीन की कमी से थायरोक्सिन नहीं बनता और गलगंड/घेंघा (Goitre) रोग हो जाता है, जिससे बचने के लिए आयोडीन युक्त नमक की सलाह दी जाती है। - तंत्रिका आवेग और हार्मोनल नियंत्रण में दो अंतर लिखें।
उत्तर: तंत्रिका आवेग त्वरित और कम समय के लिए होता है (विद्युत संकेत), जबकि हार्मोनल नियंत्रण धीमा और दीर्घकालिक होता है (रासायनिक संकेत)।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions):
- मानव मस्तिष्क की संरचना का वर्णन करें तथा इसके मुख्य भागों के कार्यों का उल्लेख करें।
- पादप हार्मोन क्या हैं? मुख्य चार पादप हार्मोन के नाम एवं उनके कार्यों की व्याख्या कीजिए।
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