अध्याय 4: उत्सर्जन (Excretion) - संपूर्ण अध्ययन नोट्स
बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं जीवविज्ञान (Science - Biology)
1. उत्सर्जन क्या है? (What is Excretion?)
जीवों के शरीर में उपापचयी क्रियाओं (Metabolic activities) के दौरान कई प्रकार के अपशिष्ट (Waste materials) एवं विषैले पदार्थों का निर्माण होता है। इन हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की जैविक प्रक्रिया को उत्सर्जन (Excretion) कहते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु: यदि ये अपशिष्ट पदार्थ (जैसे- अमोनिया, यूरिया, यूरिक अम्ल, CO2) शरीर में जमा रहें, तो यह कोशिका की कार्यप्रणाली को बाधित कर सकते हैं और जीव की मृत्यु का कारण बन सकते हैं।
उपापचयी अपशिष्ट के प्रकार (Types of Metabolic Wastes)
- नाइट्रोजनी अपशिष्ट (Nitrogenous Wastes): अमोनिया (Ammonia), यूरिया (Urea), यूरिक अम्ल (Uric Acid)।
- गैसीय अपशिष्ट (Gaseous Wastes): कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), जो श्वसन प्रक्रिया द्वारा बाहर निकलती है।
- अतिरिक्त लवण एवं जल (Excess Salt & Water): पसीने एवं मूत्र के माध्यम से निष्कासित।
2. विभिन्न जीवों में उत्सर्जन (Excretion in Different Organisms)
विभिन्न जीवों में उत्सर्जन की प्रक्रिया उनके शारीरिक संगठन के आधार पर अलग-अलग होती है:
| जीव का प्रकार | उत्सर्जी अंग / प्रक्रिया | मुख्य उत्सर्जी पदार्थ |
|---|---|---|
| एककोशिकीय जीव (जैसे- अमीबा, पैरामीशियम) | शरीर की सतह से विसरण (Diffusion) द्वारा | अमोनिया, CO2 |
| चपटे कृमि (Planaria, Tapeworm) | ज्वाला कोशिकाएँ (Flame Cells) | अमोनिया |
| केचुआ (Annelids) | नेफ्रीडिया (Nephridia) | यूरिया तथा अमोनिया |
| कीट (Insects - कॉकरोच) | मैल्पीगी नलिकाएँ (Malpighian Tubules) | यूरिक अम्ल |
| मानव एवं स्तनधारी (Mammals) | वृक्क (Kidney) | यूरिया, यूरिक अम्ल, अतिरिक्त लवण |
3. मानव उत्सर्जन तंत्र (Human Excretory System)
मानव में उत्सर्जन तंत्र मुख्य रूप से उदर गुहा (Abdominal cavity) में रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित होता है। मानव उत्सर्जन तंत्र में निम्नलिखित मुख्य अंग शामिल हैं:
- एक जोड़ी वृक्क (A pair of Kidneys)
- एक जोड़ी मूत्रवाहिनी (A pair of Ureters)
- एक मूत्राशय (Urinary Bladder)
- एक मूत्रमार्ग (Urethra)
(A) वृक्क की बाह्य एवं आंतरिक संरचना (Structure of Kidney)
वृक्क मनुष्य का सबसे प्रमुख उत्सर्जी अंग है।
- आकार एवं रंग: वृक्क का आकार सेम के बीज (Bean shaped) जैसा होता है और इसका रंग गहरा लाल-भूरा होता है।
- माप: एक वयस्क मानव में प्रत्येक वृक्क की लंबाई लगभग 10-12 सेमी, चौड़ाई 5-7 सेमी तथा मोटाई 2-3 सेमी होती है। इसका भार लगभग 120 से 170 ग्राम होता है।
- हाइलम (Hilum): वृक्क के भीतरी अवतल (Concave) भाग के केंद्र में एक नोटोच या गड्ढा होता है, जिसे हाइलम कहते हैं। इसी मार्ग से तंत्रिकाएँ, रक्त वाहिकाएँ और मूत्रवाहिनी प्रवेश करती हैं।
- आंतरिक भाग: वृक्क दो मुख्य भागों में बँटा होता है:
- कोर्टेक्स (Cortex): बाहरी हल्का भाग।
- मेडुला (Medulla): भीतरी गहरा भाग, जो शंकुधारी पिरामिडों (Renal Pyramids) में विभाजित होता है।
(B) नेफ्रॉन या वृक्काणु (Nephron: Structural & Functional Unit)
प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 से 12 लाख सूक्ष्म नलीदार संरचनाएँ पाई जाती हैं, जिन्हें नेफ्रॉन (Nephron) या वृक्काणु कहते हैं। नेफ्रॉन ही वृक्क की रचनात्मक तथा कार्यात्मक इकाई (Structural and Functional Unit) है।
नेफ्रॉन की संरचना के मुख्य भाग:
- बोमन सम्पुट (Bowman's Capsule): यह नेफ्रॉन के ऊपरी सिरे पर स्थित एक कप/कटोरी के आकार की थैली जैसी संरचना होती है।
- ग्लोमेरुलस (Glomerulus): बोमन सम्पुट के अंदर पतली रक्त कोशिकाओं का एक गुच्छा/जाल होता है, जिसे ग्लोमेरुलस कहते हैं। यह धमनी की अभिवाही धम निका (Afferent arteriole) द्वारा बनता है।
- मालपीगी कोश (Malpighian Body): बोमन सम्पुट और ग्लोमेरुलस को सम्मिलित रूप से मालपीगी कोश कहा जाता है।
- वृक्क नलिका (Renal Tubule): बोमन सम्पुट के पीछे का नलिकाकार भाग, जो तीन मुख्य हिस्सों में विभाजित होता है:
- समीपस्थ संवलित नलिका (Proximal Convoluted Tubule - PCT)
- हेनले का लूप (Henle's Loop)
- दूरस्थ संवलित नलिका (Distal Convoluted Tubule - DCT)
- संग्राहक नलिका (Collecting Duct): यह कई नेफ्रॉनों से मूत्र एकत्र करके पेल्विस और मूत्रवाहिनी में भेजती है।
4. मूत्र निर्माण की प्रक्रिया (Mechanism of Urine Formation)
मानव शरीर में मूत्र का निर्माण तीन मुख्य चरणों में संपन्न होता है:
1. परानिस्पंदन (Ultrafiltration)
अभिवाही धम निका (Afferent arteriole) का व्यास अपवाही धम निका (Efferent arteriole) से अधिक होता है। इसके कारण ग्लोमेरुलस में उच्च रक्तचाप उत्पन्न होता है। इस उच्च दाब पर रक्त में से जल, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण और यूरिया छनकर बोमन सम्पुट की गुहा में पहुँच जाते हैं। इस छने हुए द्रव को ग्लोमेरुलर निस्यंद (Glomerular Filtrate) कहते हैं।
2. वर्णात्मक पुनरावशोषण (Selective Reabsorption)
ग्लोमेरुलर निस्यंद जब समीपस्थ संवलित नलिका (PCT) और हेनले के लूप से गुजरता है, तब शरीर के लिए उपयोगी पदार्थ जैसे—ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, आवश्यक लवण और जल का अधिकांश भाग पुनः रक्त वाहिकाओं में अवशोषित कर लिया जाता है।
3. नलिकीय स्रावण (Tubular Secretion)
रक्त में बचे हुए कुछ अपशिष्ट पदार्थ (जैसे- पोटैशियम आयन, हाइड्रोजन आयन, औषधियाँ) सीधे नलिका के द्रव में स्रावित कर दिए जाते हैं। अंत में बची हुई सांद्रित द्रव सामग्री को ही मूत्र (Urine) कहा जाता है।
मूत्र का संघटन (Composition of Urine):
• जल: लगभग 95-96%
• यूरिया: लगभग 2-2.5%
• अन्य अपशिष्ट (यूरिक अम्ल, क्रिएटिनिन, लवण): लगभग 1.5-2%
• पीला रंग: यूरोक्रोम (Urochrome) नामक वर्णक के कारण होता है।
5. वृक्क खराबी एवं हीमोडायलिसिस (Kidney Failure & Hemodialysis)
संक्रमण, उच्च रक्तचाप (Hypertension), मधुमेह (Diabetes) या किसी दुर्घटना के कारण जब किसी व्यक्ति के दोनों वृक्क काम करना बंद कर देते हैं, तो इसे वृक्क पात (Kidney Failure) कहते हैं।
कृत्रिम वृक्क (Artificial Kidney / Hemodialysis)
जब वृक्क कार्य करना बंद कर देता है, तो शरीर में जहरीले नाइट्रोजनी अपशिष्ट एकत्रित होने लगते हैं। ऐसे में एक मशीन द्वारा रोगी के रक्त को शुद्ध करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसे हीमोडायलिसिस (Hemodialysis) कहते हैं।
डायलिसिस की कार्यप्रणाली:
- रोगी की मुख्य धमनी से रक्त निकालकर उसे 0°C तक ठंडा किया जाता है और उसमें हिपेरिन (Heparin - थक्का विरोधी) मिलाया जाता है।
- रक्त को एक डायलाइज़र (Dialyzer) मशीन में भेजा जाता है, जिसमें सेलोफेन (Cellophane) की बनी अर्धपारगम्य नलिकाएं होती हैं जो डायलिसिस द्रव में डूबी रहती हैं।
- अपसरण (Osmosis/Diffusion) द्वारा नाइट्रोजनी अपशिष्ट (यूरिया, यूरिक अम्ल) डायलिसिस द्रव में चले जाते हैं।
- शुद्ध रक्त में पुनः एंटी-हिपेरिन मिलाकर रोगी की सिरा (Vein) के माध्यम से शरीर में वापस डाल दिया जाता है।
6. पौधों में उत्सर्जन (Excretion in Plants)
जंतुओं की तुलना में पौधों में कोई विशेष उत्सर्जी अंग नहीं पाए जाते हैं। पौधे अपने अपशिष्ट पदार्थों को विभिन्न सरल विधियों द्वारा निष्कासित करते हैं:
- गैसीय अपशिष्ट: प्रकाश संश्लेषण के दौरान उत्पादित O2 तथा श्वसन के दौरान CO2 रंध्रों (Stomata) एवं वातरंध्रों (Lenticels) के माध्यम से बाहर निकलती है।
- वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): अतिरिक्त जल पत्तियों के रंध्रों द्वारा वाष्प बनकर बाहर निकलता है।
- पत्तियों एवं छाल का गिरना: पौधे अपने कुछ अपशिष्ट पदार्थों को पुरानी पत्तियों, छालों और फलों में जमा कर लेते हैं, जो समय-समय पर टूटकर गिर जाते हैं।
- अन्य पादप अपशिष्ट:
- गोंद (Gum): बबूल एवं आम के तनों से निकलने वाला स्राव।
- रेज़िन (Resin): चीड़ (Pine) जैसे नग्नबीजी पौधों का उत्सर्जी पदार्थ।
- लैटेक्स (Latex): गाढ़ा दूधिया द्रव (उदा- बरगद, कनेर, रबर के पौधे)।
- टैनिन (Tannin): चाय की पत्तियों एवं वृक्षों की छाल में पाया जाने वाला उत्सर्जी पदार्थ।
7. बिहार बोर्ड परीक्षा हेतु अति-महत्वपूर्ण प्रश्न (VVI Questions)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions - MCQs)
- मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है, जो संबंधित है:
(A) पोषण से (B) श्वसन से (C) उत्सर्जन से (D) परिवहन से
उत्तर: (C) उत्सर्जन से - वृक्क की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई को क्या कहते हैं?
(A) न्यूरॉन (B) नेफ्रॉन (C) ग्लोमेरुलस (D) बोमन सम्पुट
उत्तर: (B) नेफ्रॉन - मानव मूत्र का पीला रंग किस वर्णक के कारण होता है?
(A) क्लोरोफिल (B) यूरोक्रोम (C) कैरोटीन (D) हीमोग्लोबिन
उत्तर: (B) यूरोक्रोम - रेज़िन एवं गोंद पौधे के किस भाग में संचित रहते हैं?
(A) नए जाइलम में (B) पुराने जाइलम में (C) फ्लोएम में (D) छाल में
उत्तर: (B) पुराने जाइलम में
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 Marks)
प्रश्न 1: उत्सर्जन की परिभाषा लिखें। इसके दो मुख्य उत्सर्जी अंगों के नाम बताएँ।
उत्तर: शरीर की कोशिकाओं में होने वाली उपापचयी क्रियाओं के फलस्वरूप बने विषैले तथा अनावश्यक अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन कहलाती है। मनुष्य के दो मुख्य उत्सर्जी अंग: 1. वृक्क (Kidney) 2. फेफड़े (Lungs)।
प्रश्न 2: पौधे अपना उत्सर्जी पदार्थ किस प्रकार बाहर निकालते हैं?
उत्तर: पौधे अपशिष्ट पदार्थों को पुरानी पत्तियों के गिरने, तने से गोंद एवं रेज़िन के स्रावण, तथा रंध्रों द्वारा वाष्पोत्सर्जन एवं गैस विनिमय प्रक्रिया द्वारा बाहर निकालते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 Marks)
प्रश्न 1: नेफ्रॉन (वृक्काणु) की संरचना का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाएँ तथा इसके कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर: [उपरोक्त खंड 3(B) एवं खंड 4 के विवरण के अनुसार उत्तर लिखें। चित्र में बोमन सम्पुट, ग्लोमेरुलस, हेनले लूप और संग्राहक नलिका को स्पष्ट दर्शाएँ।]
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