Bihar Board Class 10th Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi: अम्ल, क्षारक एवं लवण (Acids, Bases & Salts)

बिहार बोर्ड कक्षा 10वीं रसायन विज्ञान अध्याय 2 (अम्ल, क्षारक एवं लवण) के आसान और विस्तृत नोट्स। परीक्षा की तैयारी के लिए मुख्य परिभाषाएं, रासायनिक समीकरण और Q&A।

Bihar Board Class 10th Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi: अम्ल, क्षारक एवं लवण (Acids, Bases & Salts)

परिचय (Introduction)

हमारे दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न पदार्थों का स्वाद अलग-अलग होता है। कुछ पदार्थ खट्टे होते हैं, कुछ कड़वे होते हैं, तो कुछ नमकीन होते हैं। पदार्थों का यह स्वाद उनमें उपस्थित रासायनिक यौगिकों—अम्ल (Acids), क्षारक (Bases) और लवण (Salts) के कारण होता है।


1. अम्ल (Acids)

अम्ल वे रासायनिक पदार्थ हैं जो स्वाद में खट्टे होते हैं और जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H+) प्रदान करते हैं।

अम्ल के प्रमुख गुण:

  • इनका स्वाद खट्टा होता है।
  • ये नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं।
  • इनका pH मान 7 से कम होता है।
  • ये जलीय विलयन में H+ (या H3O+) आयन देते हैं।
  • ये धातुओं से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस (H2) मुक्त करते हैं।

अम्ल के प्रकार:

  1. प्रबल अम्ल (Strong Acids): जो जल में पूरी तरह आयनित होकर अधिक मात्रा में H+ आयन देते हैं।
    उदाहरण: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4), नाइट्रिक अम्ल (HNO3)।
  2. दुर्बल अम्ल (Weak Acids): जो जल में आंशिक रूप से आयनित होकर कम H+ आयन देते हैं।
    उदाहरण: एसिटिक अम्ल (CH3COOH), साइट्रिक अम्ल, फॉर्मिक अम्ल।

प्राकृतिक स्रोतों में पाए जाने वाले प्रमुख अम्ल:

  • सिरका (Vinegar): एसिटिक अम्ल
  • संतरा/नींबू: साइट्रिक अम्ल
  • इमली: टार्टरिक अम्ल
  • टमाटर: ऑक्सैलिक अम्ल
  • खट्टा दूध/दही: लैक्टिक अम्ल
  • चींटी का डंक: मेथेनॉइक अम्ल (फॉर्मिक अम्ल)

2. क्षारक एवं क्षार (Bases and Alkalis)

क्षारक (Bases): वे पदार्थ हैं जो स्वाद में कड़वे होते हैं, स्पर्श करने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं और जलीय विलयन में हाइड्रॉक्साइड आयन (OH-) देते हैं।

क्षार (Alkalis): जल में घुलनशील क्षारकों को 'क्षार' कहा जाता है। (ध्यान दें: सभी क्षार क्षारक होते हैं, लेकिन सभी क्षारक क्षार नहीं होते)।

क्षारक के प्रमुख गुण:

  • इनका स्वाद कड़वा होता है।
  • ये लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं।
  • इनका pH मान 7 से अधिक होता है।
  • ये जलीय विलयन में OH- आयन प्रदान करते हैं।

क्षारक के प्रकार:

  • प्रबल क्षारक: सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH)।
  • दुर्बल क्षारक: अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (NH4OH), मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड [Mg(OH)2]।

3. सूचक (Indicators)

वे पदार्थ जिनका उपयोग किसी विलयन के अम्लीय या क्षारकीय होने की पहचान करने के लिए किया जाता है, उन्हें सूचक कहते हैं। सूचक अपना रंग या गंध बदलकर अम्ल या क्षारक की उपस्थिति दर्शाते हैं।

सूचक के प्रकार:

  1. प्राकृतिक सूचक (Natural Indicators): जो प्रकृति या पौधों से प्राप्त होते हैं।
    उदाहरण: लिटमस (लाइकेन पौधे से प्राप्त), हल्दी, लाल पत्ता गोभी।
    • हल्दी अम्ल में पीली रहती है, लेकिन क्षारक के संपर्क में आने पर लाल-भूरी हो जाती है।
  2. कृत्रिम या संश्लेषित सूचक (Synthetic Indicators): जो रसायनों द्वारा बनाए जाते हैं।
    उदाहरण: फिनॉल्पथेलिन, मेथिल ऑरेंज।
    • फिनॉल्पथेलिन अम्ल में रंगहीन रहता है और क्षारक में गुलाबी हो जाता है।
  3. गंधी सूचक (Olfactory Indicators): जिन पदार्थों की गंध अम्लीय या क्षारकीय माध्यम में बदल जाती है।
    उदाहरण: प्याज, वैनिला, लौंग का तेल।

4. अम्ल एवं क्षारक के रासायनिक गुण

1. धातु के साथ अभिक्रिया:

अम्ल और क्षारक धातुओं से अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।

अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस

Zn(s) + 2HCl(aq) → ZnCl2(aq) + H2(g)↑

हाइड्रोजन गैस की जाँच (Pop Test): जब जलती हुई मोमबत्ती को निकल रही गैस के पास लाया जाता है, तो वह 'पॉप' (Pop) की ध्वनि के साथ जलती है।

2. उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction):

जब अम्ल और क्षारक आपस में अभिक्रिया करते हैं, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त कर देते हैं और लवण तथा जल का निर्माण करते हैं। इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।

अम्ल + क्षारक → लवण + जल

HCl(aq) + NaOH(aq) → NaCl(aq) + H2O(l)

3. धातु कार्बोनेट तथा धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया:

अम्ल धातु कार्बोनेट एवं धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट से अभिक्रिया करके लवण, जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस बनाते हैं।

Na2CO3 + 2HCl → 2NaCl + H2O + CO2↑


5. pH स्केल (pH Scale)

किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन (H+) की सांद्रता ज्ञात करने के लिए विकसित किए गए स्केल को pH स्केल कहते हैं। (यहाँ 'p' का अर्थ 'पुसांस' यानी शक्ति है)।

  • pH = 7 : उदासीन विलयन (उदा. शुद्ध जल)
  • pH < 7 : अम्लीय विलयन (मान जितना कम, अम्लीयता उतनी अधिक)
  • pH > 7 : क्षारकीय विलयन (मान जितना अधिक, क्षारकीयता उतनी अधिक)

दैनिक जीवन में pH का महत्व:

  1. पौधों एवं पशुओं की pH संवेदनशीलता: हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच कार्य करता है। जब वर्षा के जल का pH मान 5.6 से कम हो जाता है, तो उसे अम्लीय वर्षा (Acid Rain) कहते हैं।
  2. मिट्टी का pH: अच्छी फसल के लिए मिट्टी का pH एक विशिष्ट परास में होना चाहिए। मिट्टी की अम्लीयता दूर करने के लिए बिना बुझा चूना (CaO) या बुझा चूना [Ca(OH)2] मिलाया जाता है।
  3. पाचन तंत्र में pH: हमारा पेट (आमाशय) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) उत्पन्न करता है। अपच (Indigestion) की स्थिति में अधिक अम्ल बनने पर एंटैसिड (Antacid) जैसे 'मिल्क ऑफ मैग्नीशिया' [Mg(OH)2] का उपयोग किया जाता है।
  4. दंत क्षय (Tooth Decay): जब मुँह का pH मान 5.5 से कम हो जाता है, तो दाँतों का इनैमल (कैल्शियम फॉस्फेट) संक्षारित होने लगता है।

6. लवण एवं उनके यौगिक (Salts & Their Compounds)

अम्ल एवं क्षारक की उदासीनीकरण अभिक्रिया से प्राप्त आयनिक यौगिकों को लवण (Salts) कहते हैं।

साधारण नमक से रसायन (Chemicals from Common Salt - NaCl):

1. साधारण नमक (Sodium Chloride - NaCl):

यह सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया से बनता है। इसका उपयोग भोजन में और अन्य रसायनों के निर्माण में होता है।

2. सोडियम हाइड्रॉक्साइड / कॉस्टिक सोडा (NaOH):

सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (लवण जल) से विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड बनाता है। इस प्रक्रिया को क्लोरो-क्षार प्रक्रिया (Chlor-alkali process) कहते हैं।

2NaCl(aq) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq) + Cl2(g) + H2(g)

3. विरंजक चूर्ण / ब्लीचिंग पाउडर (Bleaching Powder - CaOCl2):

शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन गैस की क्रिया से विरंजक चूर्ण का निर्माण होता है।

Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 + H2O

  • उपयोग: वस्त्र उद्योग में सूती कपड़ों के विरंजन के लिए, पीने के पानी को रोगाणुमुक्त करने में, और रासायनिक उद्योगों में उपचायक के रूप में।

4. बेकिंग सोडा / खाने का सोडा (Sodium Hydrogen Carbonate - NaHCO3):

यह कच्चे पदार्थों में सोडियम क्लोराइड का उपयोग करके बनाया जाता है।

NaCl + H2O + CO2 + NH3 → NH4Cl + NaHCO3

  • उपयोग: बेकिंग पाउडर बनाने में (पकौड़े आदि को कुरकुरा बनाने के लिए), एंटैसिड के रूप में, और अग्निशामक (Fire Extinguisher) यंत्रों में।

5. धावन सोडा / धोने का सोडा (Washing Soda - Na2CO3·10H2O):

बेकिंग सोडा को गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट प्राप्त होता है, जिसके पुनः क्रिस्टलीकरण से धावन सोडा बनता है।

Na2CO3 + 10H2O → Na2CO3·10H2O

  • उपयोग: काँच, साबुन एवं कागज उद्योगों में, घरों में सफाई के लिए, और जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए।

6. प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris - CaSO4·½H2O):

जिप्सम (CaSO4·2H2O) को 373 K (100°C) पर गर्म करने पर यह जल के अणुओं का त्याग कर प्लास्टर ऑफ पेरिस (कैलशियम सल्फेट अर्धहाइड्रेट) बनाता है।

CaSO4·2H2O [जिप्सम] + ऊष्मा → CaSO4·½H2O + 1½H2O

  • उपयोग: टूटी हुई हड्डियों को सही जगह स्थिर रखने के लिए प्लास्टर चढ़ाने में, खिलौने और मूर्तियां बनाने में, और सतहों को चिकना बनाने में।

7. बिहार बोर्ड परीक्षा - अति महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (BSEB VVI Questions)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)

  1. अम्ल का pH मान कितना होता है?
    उत्तर: 7 से कम
  2. शुद्ध जल का pH मान कितना होता है?
    उत्तर: 7 (उदासीन)
  3. दाँतों का इनैमल किस पदार्थ का बना होता है?
    उत्तर: कैल्शियम फॉस्फेट
  4. प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक सूत्र क्या है?
    उत्तर: CaSO4·½H2O
  5. चींटी के डंक में कौन सा अम्ल पाया जाता है?
    उत्तर: मेथेनॉइक अम्ल (फॉर्मिक अम्ल)

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: पीतल एवं तांबे के बर्तनों में दही एवं खट्टे पदार्थ क्यों नहीं रखने चाहिए?
उत्तर: दही एवं खट्टे पदार्थों में अम्ल पाया जाता है। जब इन्हें पीतल या तांबे के बर्तनों में रखा जाता है, तो अम्ल धातु के साथ अभिक्रिया करके विषैले/हानिकारक धातु लवण का निर्माण करते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।

प्रश्न 2: उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? दो उदाहरण दें।
उत्तर: जब अम्ल और क्षारक आपस में अभिक्रिया करके एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त कर लवण और जल बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण 1: HCl + NaOH → NaCl + H2O
उदाहरण 2: H2SO4 + 2KOH → K2SO4 + 2H2O

प्रश्न 3: बेकिंग सोडा और धावन सोडा में कोई दो अंतर लिखिए।
उत्तर:

  • बेकिंग सोडा: इसका रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (NaHCO3) है और इसका उपयोग भोजन पकाने तथा बेकरी में किया जाता है।
  • धावन सोडा: इसका रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट (Na2CO3·10H2O) है और इसका उपयोग कपड़ों की धुलाई तथा जल की कठोरता दूर करने में होता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न: प्लास्टर ऑफ पेरिस का निर्माण कैसे होता है? इसके प्रमुख गुण एवं दो उपयोग लिखें।
उत्तर:
निर्माण विधि: जब जिप्सम (CaSO4·2H2O) को 373 K (100°C) के तापमान पर सावधानीपूर्वक गर्म किया जाता है, तो यह जल के डेढ़ (1.5) अणु का त्याग करके प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाता है।
CaSO4·2H2O [जिप्सम] → CaSO4·½H2O [POP] + 1½H2O

प्रमुख गुण:

  1. यह एक सफेद रंग का चूर्ण होता है।
  2. जल मिलाने पर यह पुनः जमकर कठोर जिप्सम में बदल जाता है।

प्रमुख उपयोग:

  • डॉक्टरों द्वारा टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने और स्थिर रखने के लिए प्लास्टर के रूप में।
  • सजावटी सामान, खिलौने और मूर्तियों के साँचे बनाने में।
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