Bihar Board Class 12th Biology Chapter 3 Notes in Hindi: मानव जनन (Human Reproduction)

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं बायोलॉजी अध्याय 3 (मानव जनन) के आसान और विस्तृत नोट्स। परीक्षा की तैयारी के लिए मुख्य परिभाषाएं, आरेखीय व्याख्या और Q&A।

Bihar Board Class 12th Biology Chapter 3 Notes in Hindi: मानव जनन (Human Reproduction)

परिचय (Introduction)

मानव लैंगिक रूप से जनन करने वाला तथा जरायुज (Viviparous) प्राणी है, अर्थात यह सीधे शिशु को जन्म देता है। मानव में जनन की प्रक्रिया में नर और मादा जनन अंगों की मुख्य भूमिका होती है। इस अध्याय में हम नर एवं मादा जनन तंत्र, युग्मकजनन, आर्तव चक्र, निषेचन, रोपण, संगर्भता तथा प्रसव की संपूर्ण प्रक्रिया को विस्तार से समझेंगे।


1. नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)

मानव नर जनन तंत्र श्रोणि क्षेत्र (Pelvic Region) में स्थित होता है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित अंग आते हैं:

(A) प्राथमिक जनन अंग - वृषण (Testes):

  • मानव में 1 जोड़ी (दो) वृषण पाए जाते हैं, जो शरीर के बाहर एक थैली जैसी संरचना में स्थित होते हैं जिसे वृषण कोष (Scrotum) कहते हैं।
  • वृषण कोष का कार्य: यह वृषण का तापमान शरीर के सामान्य तापमान (37°C) से 2 से 2.5°C कम बनाए रखता है, जो शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) के लिए आवश्यक है।
  • प्रत्येक वृषण में लगभग 250 कक्ष होते हैं, जिन्हें वृषण पालिका (Testicular Lobules) कहते हैं।
  • प्रत्येक पालिका में 1 से 3 अत्यधिक कुंडलित **शुक्रजनक नलिकाएं (Seminiferous Tubules)** पाई जाती हैं, जिनमें शुक्राणु बनते हैं।

शुक्रजनक नलिका में दो प्रकार की कोशिकाएं होती हैं:

  1. नर जर्म कोशिकाएं (Spermatogonia): इनमें अर्धसूत्री विभाजन द्वारा शुक्राणु बनते हैं।
  2. सरटोली कोशिकाएं (Sertoli Cells): ये विकसित हो रहे शुक्राणुओं को **पोषण (Nourishment)** प्रदान करती हैं।

शुक्रजनक नलिकाओं के बाहर **अंतराली कोशिकाएं या लेडिग कोशिकाएं (Leydig Cells)** पाई जाती हैं, जो नर हार्मोन **एंड्रोजन (टेस्टोस्टेरोन)** का स्रावण करती हैं।

(B) सहायक नलिकाएं (Accessory Ducts):

  • वृषण जालिकाएं (Rete Testis)
  • शुक्रवाहिकाएं (Vasa Efferentia)
  • अधिवृषण (Epididymis): यहाँ शुक्राणु अस्थायी रूप से परिपक्व और संग्रहीत होते हैं।
  • शुक्रवाहन (Vas Deferens): यह शुक्राणुओं को शुक्राशय तक ले जाती है।

(C) सहायक ग्रंथियां (Accessory Glands):

  1. शुक्राशय (Seminal Vesicles - 1 जोड़ी): यह शुक्राणु द्रव का लगभग 60-70% भाग बनाता है, जिसमें फ्रुक्टोज, कैल्शियम और एंजाइम होते हैं।
  2. पुरस्थ ग्रंथि (Prostate Gland - 1): यह एक क्षारीय द्रव स्रावित करती है जो शुक्राणुओं की गतिशीलता बढ़ाती है।
  3. बल्बोयूरेथल या काउपर ग्रंथियां (Bulbourethral Glands - 1 जोड़ी): यह मैथुन के समय शिश्न के स्नेहन (Lubrication) में मदद करती हैं।

इन ग्रंथियों का स्राव और शुक्राणु मिलकर **वीर्य (Semen)** बनाते हैं।


2. मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)

मादा जनन तंत्र भी श्रोणि क्षेत्र में स्थित होता है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित अंग शामिल हैं:

(A) प्राथमिक जनन अंग - अंडाशय (Ovaries):

  • मादा में 1 जोड़ी अंडाशय उदर के निचले भाग में दोनों ओर स्थित होते हैं।
  • अंडाशय का मुख्य कार्य **मादा युग्मक (अंडाणु/Ova)** का निर्माण करना तथा स्टेरॉयड हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) का स्रावण करना है।

(B) सहायक नलिकाएं (Accessory Ducts):

  1. अंडवाहिनी / फेलोपियन नलिका (Fallopian Tube): यह लगभग 10-12 सेमी लंबी होती है। इसके तीन भाग होते हैं—
    • कीपक (Infundibulum): अंडाशय के पास स्थित कीप के आकार का भाग जिसमें अंगुली जैसी संरचनाएं **झालर (Fimbriae)** होती हैं जो अंडोत्सर्ग के बाद अंडाणु को एकत्र करती हैं।
    • तुंबिका (Ampulla): यह मध्य फुला हुआ भाग है।
    • संकीर्ण पथ (Isthmus): यह गर्भाशय से जुड़ने वाला अंतिम भाग है।
  2. गर्भाशय (Uterus / Womb): यह उल्टी रखी हुई नाशपाती के आकार का होता है। इसकी भित्ति में तीन परतें होती हैं:
    • परिगर्भाशय (Perimetrium): सबसे बाहरी पतली झिल्ली।
    • पेशीगर्भाशय (Myometrium): मध्य की मोटी चिकनी पेशी परत (प्रसव के समय इसमें तीव्र संकुचन होता है)।
    • अन्तःगर्भाशय (Endometrium): आंतरिक ग्रंथिलीय परत (आर्तव चक्र के दौरान इसमें चक्रीय परिवर्तन होते हैं)।
  3. योनि (Vagina): यह एक पेशीय नली है जो गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) के माध्यम से बाहर खुलती है।

(C) स्तन ग्रंथियां (Mammary Glands):

यह मादा का एक सहायक जनन लक्षण है, जो शिशु के जन्म के बाद दुग्ध स्रावण (Lactation) का कार्य करती है।


3. युग्मकजनन (Gametogenesis)

प्राथमिक जनन अंगों (वृषण एवं अंडाशय) में अगुणित (n) युग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया को **युग्मकजनन** कहते हैं।

(A) शुक्राणुजनन (Spermatogenesis):

वृषण में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को शुक्राणुजनन कहते हैं। यह किशोरावस्था (Puberty) में प्रारंभ होती है।

  1. गुणन प्रावस्था: स्पर्मेटोगोनिया (2n) समसूत्री विभाजन द्वारा अपनी संख्या बढ़ाते हैं।
  2. वृद्धि प्रावस्था: स्पर्मेटोगोनिया आकार में बड़े होकर **प्राथमिक शुक्राणु कोशिका (Primary Spermatocyte - 2n)** बनाते हैं।
  3. परिपक्वता प्रावस्था:
    • प्रथम अर्धसूत्री विभाजन द्वारा 2 अगुणित **द्वितीयक शुक्राणु कोशिकाएं (Secondary Spermatocytes - n)** बनती हैं।
    • द्वितीय अर्धसूत्री विभाजन द्वारा 4 अगुणित **शुक्राणु प्रसू (Spermatids - n)** बनते हैं।
  4. शुक्राणु कायांतरण (Spermiogenesis): स्पर्मेटिड का परिपक्व शुक्राणु (Spermatozoa) में रूपांतरण।

शुक्राणु की संरचना (Structure of Sperm):

  • शीर्ष (Head): इसमें अगुणित केंद्रक होता है। इसके अग्र भाग पर **अग्रपिंडक (Acrosome)** पाया जाता है जिसमें निषेचन में सहायक हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (हायाल्यूरोनिडेज) होते हैं।
  • ग्रीवा (Neck): शीर्ष और मध्य भाग को जोड़ती है।
  • मध्य खंड (Middle Piece): इसमें अत्यधिक **माइटोकॉन्ड्रिया** पाए जाते हैं जो शुक्राणु को तैरने के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसे शुक्राणु का 'पावर हाउस' कहते हैं।
  • पुच्छ (Tail): यह शुक्राणु को गतिशीलता प्रदान करती है।

(B) अंडाणुजनन (Oogenesis):

अंडाशय में परिपक्व मादा युग्मक (अंडाणु) के निर्माण की प्रक्रिया को अंडाणुजनन कहते हैं।

  • यह प्रक्रिया भ्रूणीय परिवर्तन के दौरान ही (जन्म से पहले) शुरू हो जाती है।
  • भ्रूण में लाखों अंड जननी (Oogonia) बनती हैं। जन्म के बाद नई ऊगोनिया नहीं बनतीं।
  • प्राथमिक अंडक (Primary Oocyte) अर्धसूत्री विभाजन-I की प्रोफेज-I में रुक जाते हैं।
  • किशोरावस्था में GnRH, FSH और LH हार्मोन के प्रभाव से यह प्रक्रिया पुनः शुरू होती है।
  • एक प्राथमिक अंडक से विभाजित होकर केवल **1 परिपक्व अंडाणु (Ovum - n)** और **ध्रुवीय पिंड (Polar bodies)** बनते हैं।

4. आर्तव चक्र / मासिक धर्म (Menstrual Cycle)

मादा प्राइमेट्स (मानव, बंदर) के जनन मार्ग में होने वाले चक्रीय परिवर्तनों को **आर्तव चक्र** कहते हैं। यह सामान्यतः 28-29 दिनों का होता है।

आर्तव चक्र की प्रावस्थाएं (Phases):

  1. आर्तव प्रावस्था (Menstrual Phase - 1 से 5 दिन): गर्भाशय का अन्तःगर्भाशय (Endometrium) टूटता है और रक्तस्राव के रूप में योनि से बाहर निकलता है।
  2. पुटक प्रावस्था (Follicular Phase - 6 से 13 दिन): पियुष ग्रंथि के FSH के प्रभाव से अंडाशय में प्राथमिक पुटक परिपक्व होकर **ग्राफिक पुटक (Graafian Follicle)** बनता है तथा एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है।
  3. अंडोत्सर्ग प्रावस्था (Ovulatory Phase - 14वाँ दिन): चक्र के मध्य में **LH का स्तर उच्चतम (LH Surge)** हो जाता है, जिससे ग्राफिक पुटक फट जाता है और अंडाणु बाहर निकल आता है। इसे **अंडोत्सर्ग (Ovulation)** कहते हैं।
  4. स्रावी / ल्यूटियल प्रावस्था (Luteal Phase - 15 से 28 दिन): फटे हुए ग्राफिक पुटक के अवशेष से **कॉर्पस ल्यूटियम (Corpus Luteum)** बनता है, जो प्रचुर मात्रा में **प्रोजेस्टेरोन** हार्मोन स्रावित करता है (जो संगर्भता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है)।

5. निषेचन एवं रोपण (Fertilization and Implantation)

निषेचन (Fertilization):

संभोग (Coitus) के दौरान वीर्य योनि में स्खलित होता है। शुक्राणु तैरते हुए गर्भाशय से होते हुए फेलोपियन नलिका के **तुंबिका-संकीर्ण पथ संधि (Ampullary-Isthmic Junction)** पर पहुँचते हैं।

यहाँ शुक्राणु और अंडाणु का संलयन होता है जिससे **द्विगुणित युग्मनज (Zygote - 2n)** बनता है।

लिंग निर्धारण (Sex Determination):

मानव में लिंग निर्धारण नर के शुक्राणु पर निर्भर करता है। नर में XY और मादा में XX गुणसूत्र होते हैं। यदि X-गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडाणु से मिलता है तो लड़की (XX) और यदि Y-गुणसूत्र वाला शुक्राणु मिलता है तो लड़का (XY) बनता है।

रोपण (Implantation):

युग्मनज समसूत्री विभाजन (विदलन/Cleavage) द्वारा 2, 4, 8, 16 कोशिकीय अवस्था **मोरुला (Morula)** में बदलता है। इसके बाद यह **कोरकपुटी (Blastocyst)** बनता है।

कोरकपुटी गर्भाशय के अन्तःगर्भाशय (Endometrium) में धंस जाती है, जिसे **रोपण (Implantation)** कहते हैं। इसके साथ ही संगर्भता (Pregnancy) की शुरुआत होती है।


6. संगर्भता, अपरा एवं प्रसव (Pregnancy, Placenta & Parturition)

अपरा (Placenta):

रोपण के बाद कोरकपुटी पर जरायुक अंकुरक (Chorionic Villi) बनते हैं जो गर्भाशय के ऊतकों के साथ मिलकर एक संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई बनाते हैं जिसे **अपरा (Placenta)** कहते हैं।

  • कार्य: यह भ्रूण को ऑक्सीजन और पोषण प्रदान करता है तथा CO2 एवं उत्सर्जी पदार्थों को बाहर निकालता है।
  • हार्मोन: अपरा से hCG (Human Chorionic Gonadotropin), hPL (Human Placental Lactogen), एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन स्रावित होते हैं।

प्रसव (Parturition):

मानव में संगर्भता की अवधि लगभग 9 महीने (280 दिन) होती है। गर्भाशय के तीव्र संकुचन के कारण शिशु का बाहर निकलना **प्रसव** कहलाता है।

प्रसव की प्रक्रिया **ऑक्सीटोसिन (Oxytocin)** हार्मोन द्वारा प्रेरित होती है।

दुग्ध स्रावण (Lactation):

प्रसव के बाद स्तन ग्रंथियों से दूध बनना शुरू होता है। शुरुआती दिनों में निकलने वाले पीले गाढ़े दूध को **खीस या प्रथम स्तन्य (Colostrum)** कहते हैं। इसमें प्रचुर मात्रा में **IgA एंटीबॉडी** पाई जाती है जो नवजात शिशु को रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है।


7. बिहार बोर्ड परीक्षा - अति महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (BSEB VVI Questions)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)

  1. शुक्राणु के अग्रपिंडक (Acrosome) का निर्माण किससे होता है?
    उत्तर: गोलगी काय (Golgi Body) से
  2. अंडोत्सर्ग (Ovulation) किस हार्मोन के उच्चतम स्तर पर होता है?
    उत्तर: LH Surge (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन)
  3. मानव में निषेचन कहाँ संपन्न होता है?
    उत्तर: फेलोपियन नलिका (Ampullary Region) में
  4. प्रथम स्तन्य (Colostrum) में कौन सी एंटीबॉडी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है?
    उत्तर: IgA एंटीबॉडी
  5. कॉर्पस ल्यूटियम द्वारा मुख्य रूप से कौन सा हार्मोन स्रावित होता है?
    उत्तर: प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: वृषण कोष (Scrotum) के क्या कार्य हैं?
उत्तर: वृषण कोष वृषण को शरीर के बाहर सुरक्षित रखता है और इसका तापमान शरीर के सामान्य तापमान से 2 से 2.5°C कम बनाए रखता है, जो शुक्राणुओं के निर्माण और परिपक्वता के लिए अति आवश्यक है।

प्रश्न 2: कॉर्पस ल्यूटियम का क्या महत्व है?
उत्तर: अंडोत्सर्ग के बाद फटे हुए ग्राफिक पुटक से कॉर्पस ल्यूटियम बनता है। यह प्रोजेस्टेरोन हार्मोन स्रावित करता है जो अन्तःगर्भाशय को बनाए रखता है और संगर्भता के निरन्तरता के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 3: प्रसव (Parturition) क्या है? इसमें कौन सा हार्मोन सहायक होता है?
उत्तर: संगर्भता की अवधि पूरी होने पर पूर्ण विकसित भ्रूण और गर्भाशय के संकुचन के कारण शिशु का जन्म होना प्रसव कहलाता है। इस प्रक्रिया में पीयूष ग्रंथि से स्रावित **ऑक्सीटोसिन (Oxytocin)** हार्मोन मुख्य भूमिका निभाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न: शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन करें।
उत्तर: वृषण की शुक्रजनक नलिकाओं में स्पर्मेटोगोनिया से परिपक्व शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को **शुक्राणुजनन** कहते हैं। यह निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:

1. गुणन प्रावस्था: शुक्रजनक नलिका की जननिक उपकला में स्थित स्पर्मेटोगोनिया (2n) समसूत्री विभाजन द्वारा अपनी संख्या बढ़ाते हैं।

2. वृद्धि प्रावस्था: कुछ स्पर्मेटोगोनिया पोषक पदार्थ एकत्र करके बड़े हो जाते हैं, जिन्हें प्राथमिक शुक्राणु कोशिकाएं (Primary Spermatocytes - 2n) कहते हैं।

3. परिपक्वता प्रावस्था:

  • प्राथमिक शुक्राणु कोशिका में प्रथम अर्धसूत्री विभाजन से दो अगुणित द्वितीयक शुक्राणु कोशिकाएं (n) बनती हैं।
  • द्वितीयक शुक्राणु कोशिका में द्वितीय अर्धसूत्री विभाजन से 4 अगुणित शुक्राणु प्रसू (Spermatids - n) बनते हैं।

4. शुक्राणु कायांतरण (Spermiogenesis): अचल और गोल स्पर्मेटिड विभिन्न परिवर्तनों के बाद गतिशील शुक्राणु (Spermatozoa) में बदल जाते हैं। इसके बाद सरटोली कोशिकाओं से पोषण प्राप्त कर ये मुक्त होते हैं।

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