परिचय (Introduction)
जीवविज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत **आनुवंशिकता (Heredity)** तथा **विविधता (Variation)** का अध्ययन किया जाता है, उसे आनुवंशिकी (Genetics) कहते हैं। 'Genetics' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम विलियम बेटसन (William Bateson) ने 1905 में किया था।
- आनुवंशिकता (Heredity): जनकों (Parents) से उनके लक्षणों का संतति (Offspring) में वंशानुगत होना।
- विविधता (Variation): एक ही जनक की संतानों या एक ही प्रजाति के जीवधारियों के बीच पाए जाने वाले अंतर को विविधता कहते हैं।
1. मेंडेलवाद एवं मेंडेल के प्रयोग (Mendelism)
ऑस्ट्रिया के पादरी ग्रेगर जॉन मेंडेल (Gregor Johann Mendel) को "आनुवंशिकी का जनक" (Father of Genetics) कहा जाता है। इन्होंने 1856 से 1863 के बीच उद्यान मटर (Garden Pea - Pisum sativum) पर अपना प्रयोग किया।
मटर के पौधे के चयन के कारण:
- मटर का पौधा एकवार्षिक होता है, जिससे कम समय में कई पीढ़ियों का अध्ययन किया जा सकता है।
- यह स्वभाव से स्व-परागित (Self-pollinated) होता है, परंतु इसमें आसानी से पर-परागण (Cross-pollination) भी कराया जा सकता है।
- इसमें कई स्पष्ट एवं परस्पर विरोधी लक्षण (Contrasting Traits) पाए जाते हैं।
मटर में चुने गए 7 जोड़ी विपरीत लक्षण:
- तने की लंबाई: लंबा (प्रभावी) / बौना (अप्रभावी)
- फूल का रंग: बैगनी (प्रभावी) / सफेद (अप्रभावी)
- फूल की स्थिति: अक्षीय (प्रभावी) / अंत्य (अप्रभावी)
- फली का रूप: फूली हुई (प्रभावी) / सिकुड़ी हुई (अप्रभावी)
- फली का रंग: हरा (प्रभावी) / पीला (अप्रभावी)
- बीज का आकार: गोल (प्रभावी) / झुर्रीदार (अप्रभावी)
- बीजपत्र का रंग: पीला (प्रभावी) / हरा (अप्रभावी)
2. एक-संकर संकरण एवं मेंडेल के नियम (Monohybrid Cross)
जब केवल एक जोड़ी विपरीत लक्षणों को ध्यान में रखकर क्रॉस कराया जाता है, तो उसे एक-संकर संकरण (Monohybrid Cross) कहते हैं।
उदाहरण: शुद्ध लंबे पौधे (TT) और शुद्ध बौने पौधे (tt) के बीच संकरण:
- F1 पीढ़ी: सभी पौधे 'संकर लंबे' (Tt) प्राप्त होते हैं।
- F2 पीढ़ी: F1 पौधों का स्व-परागण कराने पर:
- लक्षण प्ररूपी अनुपात (Phenotypic Ratio): 3 लंबा : 1 बौना (3 : 1)
- जीन प्ररूपी अनुपात (Genotypic Ratio): 1 TT : 2 Tt : 1 tt (1 : 2 : 1)
एक-संकर संकरण पर आधारित मेंडेल के नियम:
1. प्रभाविता का नियम (Law of Dominance):
जब दो विपरीत लक्षणों वाले शुद्ध जीवों के बीच संकरण कराया जाता है, तो F1 पीढ़ी में केवल एक ही लक्षण दिखाई देता है, जिसे **प्रभावी लक्षण (Dominant Trait)** कहते हैं। जो लक्षण F1 पीढ़ी में छिप जाता है, उसे **अप्रभावी लक्षण (Recessive Trait)** कहते हैं।
2. पृथक्करण या युग्मकों की शुद्धता का नियम (Law of Segregation):
संकर में कारक (एलील) एक साथ रहते हैं, परंतु एक-दूसरे को दूषित नहीं करते। युग्मक निर्माण के समय दोनों एलील एक-दूसरे से पृथक हो जाते हैं और केवल एक ही एलील एक युग्मक में प्रवेश करता है। इसीलिए इसे **युग्मकों की शुद्धता का नियम** भी कहते हैं।
3. द्वि-संकर संकरण (Dihybrid Cross)
जब दो जोड़ी विपरीत लक्षणों को ध्यान में रखकर क्रॉस कराया जाता है, तो इसे द्वि-संकर संकरण कहते हैं।
उदाहरण: गोल व पीले बीज वाले पौधे (RRYY) तथा झुर्रीदार व हरे बीज वाले पौधे (rryy) के बीच संकरण:
- F1 पीढ़ी: सभी बीज गोल एवं पीले (RrYy) होते हैं।
- F2 पीढ़ी का फेनोटाइप अनुपात: **9 : 3 : 3 : 1**
- 9 गोल और पीला
- 3 गोल और हरा
- 3 झुर्रीदार और पीला
- 1 झुर्रीदार और हरा
3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment):
यह नियम द्वि-संकर क्रॉस पर आधारित है। जब दो या दो से अधिक लक्षणों वाले जीवों के बीच संकरण कराया जाता है, तो एक लक्षण की वंशगति का दूसरे लक्षण की वंशगति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। प्रत्येक लक्षण के कारक स्वतंत्र रूप से संतति में वंशानुगत होते हैं।
4. मेंडेलवाद के अपवाद (Exceptions to Mendelism)
(1) अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance):
जब F1 पीढ़ी में कोई भी लक्षण पूरी तरह से प्रभावी न होकर एक मध्यवर्ती (Intermediate) लक्षण प्रदर्शित करता है, तो इसे अपूर्ण प्रभाविता कहते हैं।
उदाहरण: स्नैपड्रैगन (Antirrhinum majus / डॉग फ्लावर) और Mirabilis jalapa (4 O'clock plant)।
लाल फूल (RR) और सफेद फूल (rr) के संकरण से F1 में **गुलाबी फूल (Rr)** बनते हैं।
F2 में Phenotype और Genotype दोनों का अनुपात **1 : 2 : 1** होता है।
(2) सहप्रभाविता (Co-dominance):
जब F1 संकर में दोनों जनकों के लक्षण समान रूप से एक साथ व्यक्त होते हैं, तो इसे सहप्रभाविता कहते हैं।
उदाहरण: मनुष्यों में **ABO रक्त समूह**। IA तथा IB दोनों एलील सह-प्रभावी हैं और AB रक्त समूह बनाते हैं।
(3) बहु-एलीलता (Multiple Allelism):
जब किसी एक ही लक्षण को नियंत्रित करने के लिए दो से अधिक एलील पाए जाते हैं, तो उसे बहु-एलीलता कहते हैं। (उदा. मानव में ABO ब्लड ग्रुप प्रणाली, जिसे 3 एलील - IA, IB, i नियंत्रित करते हैं)।
5. वंशगति का क्रोमोसोम सिद्धांत एवं सहलग्नता
वंशगति का क्रोमोसोम सिद्धांत (Chromosomal Theory of Inheritance):
वर्ष 1902 में **वॉल्टर सटन (Walter Sutton) तथा थियोडोर बोवेरी (Theodor Boveri)** ने दिया। इन्होंने बताया कि जीन क्रोमोसोम पर स्थित होते हैं और क्रोमोसोम ही आनुवंशिकी का भौतिक आधार हैं।
सहलग्नता एवं पुनर्योजन (Linkage and Recombination):
थॉमस हंट मॉर्गन (Thomas Hunt Morgan) ने फल मक्खी (Drosophila melanogaster) पर प्रयोग करके सहलग्नता सिद्धांत दिया। मॉर्गन को **"प्रायोगिक आनुवंशिकी का जनक"** कहा जाता है।
- सहलग्नता (Linkage): एक ही क्रोमोसोम पर स्थित जीनों का एक साथ संतति में स्थानांतरित होने की प्रवृत्ति।
- पुनर्योजन (Recombination): जीनों के आपस में पुनर्विन्यास से नए संयोजनों का बनना (यह अर्धसूत्री विभाजन के प्रोफेज-I की पैकीटीन अवस्था में क्रॉसिंग ओवर / पारगति द्वारा होता है)।
6. लिंग निर्धारण (Sex Determination)
- XX - XY प्रकार: मानव तथा ड्रोसोफिला में। (नर में XY - विषमयुग्मकी; मादा में XX - समयुग्मकी)।
- XX - XO प्रकार: टिड्डे (Grasshopper) तथा कीटों में। (नर में केवल एक X क्रोमोसोम - XO)।
- ZZ - ZW प्रकार: पक्षियों तथा सरीसृपों में। (यहाँ मादा विषमयुग्मकी ZW होती है तथा नर समयुग्मकी ZZ होता है)।
- मधुमक्खी में अगुणित-द्विगुणित प्रकार (Haplodiploid system): निषेचित अंडे (2n) से मादा (रानी/श्रमिक) और अनिषेचित अंडे से अनिषेकजनन द्वारा अगुणित (n) नर (ड्रोन) बनता है।
7. उत्परिवर्तन (Mutation) तथा आनुवंशिक विकार
डीएनए अनुक्रम में अचानक होने वाले वंशागत परिवर्तनों को उत्परिवर्तन (Mutation) कहते हैं। उत्परिवर्तन उत्पन्न करने वाले कारकों को **उत्परिवर्तजन (Mutagens)** कहते हैं (जैसे- UV किरणें, एक्स-रे)।
मानव आनुवंशिक विकार (Genetic Disorders):
इन्हें दो भागों में बाँटा गया है:
(A) मेंडेलीय विकार (Mendelian Disorders):
ये एकल जीन में उत्परिवर्तन या रूपांतरण से होते हैं:
- हीमोफिलिया (Haemophilia): लिंग सहलग्न अप्रभावी रोग। इसमें रक्त का थक्का नहीं जमता। इसे 'शाही बीमारी' (Royal Disease) भी कहते हैं।
- वर्ण अंधता (Color Blindness): इसमें रोगी लाल और हरे रंग में अंतर नहीं कर पाता। यह X-सहलग्न अप्रभावी रोग है।
- सिकल सेल एनेमिया (Sickle-cell Anemia): अलिङ्गसूत्री अप्रभावी रोग। इसमें हीमोग्लोबिन की बीटा-शृंखला में छठे स्थान पर ग्लूटामिक अम्ल का स्थान वैलीन ले लेता है, जिससे RBC का आकार हसियाकार (Sickle shaped) हो जाता है।
- फिनाइलकीटोनूरिया (Phenylketonuria - PKU): उपापचयी त्रुटि। इसमें फिनाइल एलेनिन हाइड्रोक्सीलेज एंजाइम की कमी से मानसिक मंदता होती है।
- थैलेसीमिया (Thalassemia): अलिङ्गसूत्री अप्रभावी रक्त विकार। इसमें हीमोग्लोबिन शृंखला का संश्लेषण कम होता है।
(B) क्रोमोसोमीय विकार (Chromosomal Disorders):
ये एक या अधिक क्रोमोसोम की अनुपस्थिति, अधिकता या असामान्य विन्यास के कारण होते हैं:
- डाउन सिंड्रोम (Down's Syndrome):
- कारण: 21वें क्रोमोसोम की एकाधिसूत्रता (Trisomy of 21st chromosome - 2n+1 = 47)।
- लक्षण: छोटा कद, गोल चेहरा, बाहर निकली हुई खांचेदार जीभ, मंदबुद्धि।
- क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's Syndrome):
- कारण: एक अतिरिक्त X क्रोमोसोम की उपस्थिति (44 + XXY = 47)।
- लक्षण: पुरुष में मादा जैसे लक्षण (जैसे- स्तन का विकास या Gynecomastia), ये बंध्य (Sterile) होते हैं।
- टर्नर सिंड्रोम (Turner's Syndrome):
- कारण: एक X क्रोमोसोम की कमी (44 + XO = 45)।
- लक्षण: मादा बंध्य होती है, अंडाशय अल्पविकसित होते हैं तथा द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का अभाव होता है।
8. बिहार बोर्ड परीक्षा - अति महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (BSEB VVI Questions)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)
- "आनुवंशिकी का जनक" किसे कहा जाता है?
उत्तर: ग्रेगर जॉन मेंडेल - द्वि-संकर क्रॉस का फेनोटाइपिक अनुपात क्या होता है?
उत्तर: 9 : 3 : 3 : 1 - ABO रक्त समूह प्रणाली किसका उदाहरण है?
उत्तर: बहु-एलीलता (Multiple Allelism) एवं सहप्रभाविता (Co-dominance) - डाउन सिंड्रोम में क्रोमोसोम की कुल संख्या कितनी होती है?
उत्तर: 47 (21वीं जोड़ी में ट्राइसोमी) - सिकल सेल एनेमिया में RBC का आकार कैसा हो जाता है?
उत्तर: हंसिया के आकार का (Sickle Shaped)
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: मेंडेल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के पौधे को ही क्यों चुना?
उत्तर: मेंडेल ने मटर के पौधे को निम्नलिखित कारणों से चुना:
- यह एकवार्षिक पौधा है जिसका जीवन चक्र छोटा होता है।
- इसमें आसानी से स्व-परागण और कृत्रिम पर-परागण कराया जा सकता है।
- इसमें कई स्पष्ट विपरीत लक्षण (जैसे लंबा/बौना, पीला/हरा बीज) मौजूद थे।
प्रश्न 2: अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance) क्या है? एक उदाहरण दें।
उत्तर: जब दो जनकों के बीच क्रॉस कराया जाता है और F1 पीढ़ी में दोनों जनकों के लक्षण पूरी तरह व्यक्त न होकर एक नया मध्यवर्ती लक्षण दिखाई देता है, तो इसे अपूर्ण प्रभाविता कहते हैं।
उदाहरण: स्नैपड्रैगन (Mirabilis jalapa) में लाल (RR) और सफेद (rr) फूलों का क्रॉस कराने पर गुलाबी (Rr) फूल प्राप्त होना।
प्रश्न 3: डाउन सिंड्रोम और टर्नर सिंड्रोम में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर:
- डाउन सिंड्रोम: यह ऑटोसोम (21वीं जोड़ी क्रोमोसोम) की एकाधिसूत्रता (Trisomy) से होता है। इसमें कुल क्रोमोसोम संख्या 47 होती है।
- टर्नर सिंड्रोम: यह सेक्स क्रोमोसोम में एक X क्रोमोसोम की कमी (Monosomy) से होता है। इसमें कुल क्रोमोसोम संख्या 45 (44+XO) होती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न: मेंडेल के आनुवंशिकता के नियमों का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
उत्तर: ग्रेगर जॉन मेंडेल ने मटर के पौधों पर प्रयोग करके आनुवंशिकता के तीन मुख्य नियम दिए:
1. प्रभाविता का नियम (Law of Dominance): एक-संकर क्रॉस में F1 पीढ़ी में जो लक्षण व्यक्त होता है, उसे प्रभावी (Dominant) और जो छिप जाता है उसे अप्रभावी (Recessive) कहते हैं। (उदा. लंबा पौधा T, बौने t पर प्रभावी है)।
2. पृथक्करण का नियम (Law of Segregation): युग्मक बनते समय एलील की जोड़ी के दोनों सदस्य एक-दूसरे से पूरी तरह पृथक हो जाते हैं। प्रत्येक युग्मक में केवल एक ही एलील जाता है। इसीलिए इसे 'युग्मकों की शुद्धता का नियम' कहते हैं। F2 पीढ़ी का अनुपात **3 : 1** होता है।
3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment): द्वि-संकर क्रॉस में दो अलग-अलग लक्षणों के जीनों का वंशागति प्रभाव एक-दूसरे से स्वतंत्र होता है। F2 पीढ़ी का फेनोटाइप अनुपात **9 : 3 : 3 : 1** प्राप्त होता है।
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