Bihar Board Class 11th Home Science Chapter 3: संक्रमण, प्रतिरक्षा और विसंक्रामक (Infection, Immunity, and Disinfectants) - Complete Master Notes
बिहार बोर्ड कक्षा 11वीं गृह विज्ञान के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित अत्यंत विस्तृत, गहन अध्ययन सामग्री, वैज्ञानिक वर्गीकरण एवं प्रश्न बैंक।
विषय-सूची (Table of Contents)
- भाग 1: संक्रमण और संक्रामक रोग (Infection and Infectious Diseases)
- भाग 2: प्रतिरक्षा या रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity)
- 2.1 प्रतिरक्षा की अवधारणा एवं परिभाषा
- 2.2 शरीर की रक्षा पंक्तियाँ (Lines of Defense)
- 2.3 प्रतिरक्षा के प्रकार (Natural vs Acquired Immunity)
- 2.4 एंटीजन और एंटीबॉडी (Antigen & Antibody)
- 2.5 टीकाकरण एवं प्रतिरक्षीकरण (Vaccination & Immunization)
- 2.6 राष्ट्रीय टीकाकरण सारणी (National Immunization Schedule)
- भाग 3: निसंक्रमण एवं विसंक्रामक (Disinfection and Disinfectants)
- भाग 4: प्राथमिक चिकित्सा एवं रोगी की देखभाल
- भाग 5: बिहार बोर्ड परीक्षा हेतु वृहद प्रश्न बैंक (VVI MCQs, लघु व दीर्घ प्रश्न)
भाग 1: संक्रमण और संक्रामक रोग (Infection and Infectious Diseases)
1.1 संक्रमण एवं संक्रामक रोग की परिभाषा
स्वास्थ्य की दृष्टि से मानव शरीर जब तक रोगाणुओं से मुक्त रहता है, तब तक वह सामान्य एवं स्वस्थ कार्यप्रणाली बनाए रखता है। जब कोई हानिकारक सूक्ष्मजीव (Microorganism) शरीर में प्रवेश करता है, वहाँ अपनी संख्या में वृद्धि करता है तथा शरीर के ऊतकों को नुकसान पहुँचाता है, तो इस स्थिति को संक्रमण (Infection) कहते हैं।
वे रोग जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक संक्रमित व्यक्ति या जानवर से किसी स्वस्थ व्यक्ति में फैल सकते हैं, उन्हें संक्रामक रोग (Infectious / Communicable Diseases) कहा जाता है।
महत्वपूर्ण अंतर: सभी संक्रामक रोग संक्रमण के कारण होते हैं, परंतु सभी संक्रमण तुरंत दृश्यमान रोग का रूप नहीं लेते; यह व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है।
1.2 रोगाणुओं के प्रमुख प्रकार (Types of Pathogens)
रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को रोगाणु (Pathogens) कहते हैं। गृह विज्ञान एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान के अंतर्गत इन्हें मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में बाँटा जाता है:
| रोगाणु का प्रकार | विशेषताएँ एवं संरचना | उत्पन्न होने वाले प्रमुख रोग |
|---|---|---|
| जीवाणु (Bacteria) | ये एककोशिकीय (Unicellular) प्रोकैरियोटिक जीव हैं। ये हवा, पानी, मिट्टी तथा भोजन में पाए जाते हैं। इन्हें एंटीबायोटिक्स से नष्ट किया जा सकता है। | टीबी (क्षय रोग/Tuberculosis), हैजा (Cholera), टाइफाइड (Typhoid), टिटनेस (Tetanus), डिप्थीरिया। |
| विषाणु (Virus) | ये अतिसूक्ष्म होते हैं और जीवित कोशिकाओं के बाहर अजीवित रहते हैं। सजीव कोशिका में प्रवेश करते ही ये अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं। एंटीबायोटिक्स इन पर असर नहीं करतीं। | चेचक (Smallpox), पोलियो (Polio), खसरा (Measles), एड्स (AIDS), इन्फ्लूएंजा, डेंगू, कोविड-19। |
| कवक (Fungi) | ये परजीवी सूक्ष्मजीव हैं जो नम और गर्म स्थानों पर तेजी से बढ़ते हैं। ये त्वचा और बालों में संक्रमण फैलाते हैं। | दाद (Ringworm), खाज-खुजली, एथलीट फुट (Athlete's Foot)। |
| प्रोटोप्लाज्मा / प्रोटोजोआ (Protozoa) | ये एककोशिकीय यूरियोटिक सूक्ष्मजीव हैं जो मुख्यतः दूषित जल या वाहकों द्वारा फैलते हैं। | मलेरिया (Malaria), पेचिश (Amebic Dysentery), कालाजार (Kala-azar)। |
| कृमि (Helminths / Worms) | ये बहुकोशिकीय परजीवी जीव हैं जो आंतों में पनपते हैं। | फाइलेरिया (Elephantiasis), पेट के कीड़े (Roundworm, Tapeworm)। |
1.3 संक्रमण के प्रसार के माध्यम एवं मार्ग (Modes of Transmission)
संक्रामक रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में विभिन्न माध्यमों द्वारा संचारित होते हैं। इन माध्यमों को दो मुख्य भागों में वर्गीकृत किया जाता है:
A. प्रत्यक्ष संचरण (Direct Transmission):
- प्रत्यक्ष स्पर्श (Direct Contact): रोगी से हाथ मिलाने, गले मिलने या शारीरिक संपर्क से (जैसे- दाद, त्वचा रोग)।
- बूँद संक्रमण (Droplet Infection): रोगी के छींकने, खाँसने या बोलने से थूक की सूक्ष्म बूँदें हवा में फैलती हैं (जैसे- जुकाम, टीबी, खसरा)।
- मृदा स्पर्श (Contact with Soil): घाव पर दूषित मिट्टी लगने से (जैसे- टिटनेस)।
- गर्भाशय / अपरा द्वारा (Transplacental): संक्रमित माता से उसके भ्रूण में (जैसे- एचआईवी, हेपेटाइटिस बी)।
B. अप्रत्यक्ष संचरण (Indirect Transmission):
- दूषित वायु (Airborne): हवा में तैरते हुए धूल-कणों या जीवाणुओं द्वारा।
- दूषित जल एवं भोजन (Vehicle-borne): दूषित जल पीने या बासी व मक्खियों द्वारा दूषित भोजन खाने से (जैसे- हैजा, टाइफाइड, पीलिया)।
- वाहकों द्वारा (Vector-borne): कीटों और मच्छरों के माध्यम से:
- मादा एनोफिलीज मच्छर: मलेरिया फैलाती है।
- मादा एडीज मच्छर: डेंगू और चिकनगुनिया फैलाती है।
- घरेलू मक्खी: हैजा और पेचिश के रोगाणु ढोती है।
- अस्वच्छ वस्तुओं द्वारा (Fomite-borne): रोगी के कपड़ों, तौलिए, बर्तन, खिलौनों या बिस्तर का उपयोग करने से।
1.4 संक्रामक रोगों की विभिन्न अवस्थाएँ (Stages of Infectious Diseases)
किसी भी संक्रामक रोग के प्रकोप से लेकर ठीक होने तक शरीर निम्नलिखित क्रमिक अवस्थाओं से गुजरता है:
- उद्भवन काल / सम्प्राप्ति काल (Incubation Period): रोगाणु के शरीर में प्रवेश करने से लेकर रोग के प्रथम लक्षण प्रकट होने तक के समय को उद्भवन काल कहते हैं। हर रोग का सम्प्राप्ति काल अलग-अलग होता है।
- प्रारंभिक लक्षण काल (Prodromal Period): इस चरण में हल्के एवं सामान्य लक्षण जैसे हल्का बुखार, सिरदर्द, थकान और सुस्ती महसूस होती है।
- तीव्र प्रकोप काल (Fastigium / Acute Period): इस अवस्था में रोग के मुख्य एवं विशिष्ट लक्षण (जैसे तेज बुखार, चकत्ते, उल्टी) अपने चरम पर होते हैं।
- रोग मुक्ति / स्वास्थ्य लाभ काल (Convalescence Period): शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा रोगाणुओं के नष्ट होने के बाद रोगी धीरे-धीरे पुनः स्वस्थ होने लगता है।
1.5 प्रमुख संक्रामक रोग, उनके कारक एवं लक्षण
कक्षा 11वीं गृह विज्ञान के अंतर्गत निम्नलिखित मुख्य संक्रामक रोगों का विस्तृत अध्ययन अनिवार्य है:
| रोग का नाम | रोगजनक कारक (Pathogen) | प्रसार का माध्यम | मुख्य लक्षण |
|---|---|---|---|
| क्षय रोग (Tuberculosis / TB) | मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (जीवाणु) | वायु, बूँद संक्रमण (Droplets) | लगातार खाँसी (3 सप्ताह से अधिक), बलगम में खून, शाम को हल्का बुखार, वजन घटना। |
| हैजा (Cholera) | विब्रियो कोलेरी (जीवाणु) | दूषित जल एवं भोजन, मक्खियाँ | चावल के धोवन जैसे पतले दस्त, लगातार उल्टी, शरीर में निर्जलीकरण (Dehydration)। |
| टाइफाइड (Typhoid) | साल्मोनेला टाइफी (जीवाणु) | दूषित जल तथा भोजन | निरंतर तेज बुखार (Step-ladder fever), पेट में दर्द, जीभ पर सफेद परत। |
| मलेरिया (Malaria) | प्लाज्मोडियम (प्रोटोजोआ) | मादा एनोफिलीज मच्छर का काटना | कंपकंपी के साथ तेज बुखार उतरना-चढ़ना, अत्यधिक पसीना आना, प्लीहा (Spleen) का बढ़ना। |
| टिटनेस (Tetanus) | क्लॉस्ट्रिडियम टिटैनी (जीवाणु) | दूषित मिट्टी, लोहे के घाव | जबड़े का बंद होना (Lock-jaw), मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन। |
| पोलियो (Poliomyelitis) | पोलियो वायरस (विषाणु) | दूषित जल एवं मल-मौखिक मार्ग | बुखार, गर्दन में जकड़न, तंत्रिका तंत्र प्रभावित होना और अंगों (पैरों) में पक्षाघात (Paralysis)। |
भाग 2: प्रतिरक्षा या रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity)
2.1 प्रतिरक्षा की अवधारणा एवं परिभाषा
हमारे चारों ओर वायु, जल और भोजन में करोड़ों रोगाणु उपस्थित रहते हैं, फिर भी हम प्रतिदिन बीमार नहीं पड़ते। शरीर की वह प्राकृतिक या अर्जित क्षमता जो हानिकारक सूक्ष्मजीवों, विषैले पदार्थों और रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है, उसे प्रतिरक्षा (Immunity) या रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं।
शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली का अध्ययन **इम्यूनोलॉजी (Immunology)** कहलाता है।
2.2 शरीर की रक्षा पंक्तियाँ (Lines of Defense)
मानव शरीर में रोगाणुओं के प्रवेश को रोकने और उन्हें नष्ट करने के लिए तीन स्तरों पर सुरक्षा प्रणाली कार्य करती है:
-
प्रथम रक्षा पंक्ति (First Line of Defense - भौतिक एवं रासायनिक रोध):
- त्वचा (Skin): रोगाणुओं के लिए अभेद्य भौतिक दीवार का कार्य करती है।
- श्लेष्मा झिल्ली (Mucus Membrane): नासा गुहा और श्वसन मार्ग में रोगाणुओं को चिपकाकर रोकती है।
- अम्ल एवं स्राव: आमाशय का HCl अम्ल, आँखों के आँसू (लाइसोजाइम एंजाइम) और लार रोगाणुओं को नष्ट करते हैं।
-
द्वितीय रक्षा पंक्ति (Second Line of Defense - अवशिष्ट प्रतिरक्षा):
- भक्षक कोशिकाएँ (Phagocytes / WBCs): श्वेत रक्त कणिकाएं (जैसे न्यूट्रोफिल और मैक्रोफेज) रोगाणुओं को निगलकर नष्ट कर देती हैं।
- सूजन (Inflammation) एवं बुखार (Fever): शरीर का तापमान बढ़ाकर रोगाणुओं की वृद्धि को धीमा करना।
-
तृतीय रक्षा पंक्ति (Third Line of Defense - विशिष्ट प्रतिरक्षा):
- इसमें **लिम्फोसाइट्स (B-Cells और T-Cells)** शामिल हैं जो विशिष्ट रोगाणुओं के खिलाफ **एंटीबॉडी (Antibodies)** का निर्माण करते हैं।
2.3 प्रतिरक्षा के प्रकार (Types of Immunity)
प्रतिरक्षा को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें पुनः उप-वर्गों में बाँटा गया है:
| प्रतिरक्षा का प्रकार | उप-प्रकार | उत्पत्ति एवं कार्यप्रणाली | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1. स्वाभाविक / प्राकृतिक प्रतिरक्षा (Innate / Natural Immunity) | नस्लीय या प्रजातीय | यह जन्मजात होती है और आनुवंशिक रूप से माता-पिता से मिलती है। यह किसी विशिष्ट बीमारी के प्रति स्थायी सुरक्षा देती है। | मानव में मवेशियों के कुछ रोगों के प्रति प्राकृतिक प्रतिरोध। |
| व्यक्तिगत सम्प्राप्ति | व्यक्ति की सामान्य शारीरिक स्थिति, पोषण और त्वचा की बनावट पर निर्भर करती है। | स्वस्थ त्वचा द्वारा रोगाणुओं का रुकना। | |
| 2. उपार्जित / अर्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity) | सक्रिय प्राकृतिक (Active Natural) | किसी रोग के होने के बाद शरीर स्वयं एंटीबॉडी बनाता है। यह दीर्घकालिक होती है। | खसरा या चेचक एक बार होने के बाद जीवनभर के लिए प्रतिरक्षा बनना। |
| सक्रिय कृत्रिम (Active Artificial) | टीका (Vaccine) लगाकर शरीर को एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। | BCG, पोलियो वैक्सीन या टिटनेस टॉक्सॉइड का टीका। | |
| अक्रिय प्राकृतिक (Passive Natural) | बने-बनाए प्रतिरक्षी (Readymade Antibodies) माता से बच्चे में स्थानांतरित होते हैं। (अल्पकालिक) | माँ के प्रथम दूध (कोलोस्ट्रम / Colostrum) से IgA एंटीबॉडी मिलना। | |
| अक्रिय कृत्रिम (Passive Artificial) | तैयार एंटीबॉडी को सीधे रोगी के शरीर में सुई (Injections) द्वारा डाला जाता है। | एंटी-टिटनेस सीरम (ATS), सर्पदंश (Anti-venom) का इंजेक्शन। |
2.4 एंटीजन और एंटीबॉडी (Antigen & Antibody)
- एंटीजन (Antigen): कोई भी बाहरी हानिकारक पदार्थ, रोगाणु या प्रोटीन जो शरीर में प्रवेश करने पर प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है, उसे एंटीजन कहते हैं।
- एंटीबॉडी (Antibody / Immunoglobulin): एंटीजन के जवाब में शरीर की B-लिम्फोसाइट कोशिकाओं द्वारा बनाए गए विशेष रक्षात्मक प्रोटीन को एंटीबॉडी कहते हैं। ये Y-आकार के होते हैं और रोगाणुओं को बेअसर (Neutralize) करते हैं।
2.5 टीकाकरण एवं प्रतिरक्षीकरण (Vaccination & Immunization)
टीकाकरण (Vaccination): शरीर में किसी रोग के मृत, निष्क्रिय या कमजोर रोगाणुओं (वैक्सीन) को प्रवेश कराने की प्रक्रिया को टीकाकरण कहते हैं, ताकि शरीर बिना बीमार पड़े एंटीबॉडी बनाना सीख सके।
प्रतिरक्षीकरण (Immunization): टीकाकरण के परिणामस्वरूप शरीर में रोग के प्रति सुरक्षात्मक क्षमता उत्पन्न होने की संपूर्ण जैविक प्रक्रिया को प्रतिरक्षीकरण कहते हैं।
2.6 राष्ट्रीय टीकाकरण सारणी (National Immunization Schedule)
बिहार बोर्ड एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अनुसार शिशु एवं गर्भवती महिलाओं के लिए अनुशंसित टीकाकरण सारणी निम्नलिखित है:
| आयु / समय | टीका (Vaccine) | प्रतिरक्षित होने वाले रोग | मात्रा एवं मार्ग |
|---|---|---|---|
| जन्म के समय (At Birth) | 1. BCG 2. OPV (जीरो खुराक) 3. हेपेटाइटिस B (जन्म खुराक) |
1. क्षय रोग (टीबी) 2. पोलिया 3. हेपेटाइटिस B (यकृत संक्रमण) |
त्वचा में (ID) / ओरल बूँदें / मांसपेशी में (IM) |
| 6 सप्ताह (1½ माह) | 1. पेंटावेलेंट - 1 2. OPV - 1 3. रोटावायरस - 1 4. fIPV - 1 |
डिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस-B, हिब (Hib), पोलिया, दस्त। | मांसपेशी में (IM) / मुख द्वारा |
| 10 सप्ताह (2½ माह) | 1. पेंटावेलेंट - 2 2. OPV - 2 3. रोटावायरस - 2 |
उक्त सभी संक्रामक बीमारियों से द्वितीय सुरक्षा स्तर। | मांसपेशी में / ओरल |
| 14 सप्ताह (3½ माह) | 1. पेंटावेलेंट - 3 2. OPV - 3 3. रोटावायरस - 3 4. fIPV - 2 |
प्राथमिक टीकाकरण की पूर्णता। | मांसपेशी में / ओरल |
| 9 - 12 माह | 1. एम.आर. (MR - 1) 2. विटामिन 'A' (प्रथम खुराक) 3. JE - 1 (जापानी एन्सेफलाइटिस) |
खसरा (Measles), रुबेला, रतौंधी से बचाव, दिमागी बुखार। | त्वचा के नीचे (Subcutaneous) / ओरल सिरप |
| 16 - 24 माह | 1. MR - 2 2. DPT बूस्टर - 1 3. OPV बूस्टर |
पुनः बूस्टर सुरक्षा। | मांसपेशी में / ओरल |
| 5 - 6 वर्ष | DPT बूस्टर - 2 | डिप्थीरिया, टिटनेस, काली खाँसी। | मांसपेशी में (IM) |
| गर्भवती महिला | T.D. (टिटनेस एवं डिप्थीरिया) - 2 खुराकें | माता एवं नवजात शिशु को टिटनेस से सुरक्षा। | मांसपेशी में (IM) |
भाग 3: निसंक्रमण एवं विसंक्रामक (Disinfection and Disinfectants)
3.1 विसंक्रमण, रोगाणुनाशन और बंध्याकरण की परिभाषा
गृह विज्ञान एवं जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में घर तथा आसपास के वातावरण को रोगाणुरहित बनाना अत्यंत आवश्यक है। इससे संबंधित पारिभाषिक शब्द निम्नलिखित हैं:
- विसंक्रमण / निसंक्रमण (Disinfection): किसी वस्तु, स्थान या सतह से हानिकारक रोगाणुओं (विषाणु, जीवाणु) को रासायनिक या भौतिक साधनों द्वारा नष्ट करने या निष्क्रिय करने की प्रक्रिया।
- विसंक्रामक (Disinfectants): वे रासायनिक पदार्थ जिनका उपयोग निर्जीव वस्तुओं (जैसे- फर्श, बर्तन, नाली, वस्त्र) से रोगाणुओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है। (उदा.- फिनाइल, ब्लीचिंग पाउडर)।
- पुतिरोधी / एंटीसेप्टिक (Antiseptic): वे रासायनिक पदार्थ जो इतने मृदु होते हैं कि उनका उपयोग सजीव ऊतकों (त्वचा, घाव) पर रोगाणुओं की वृद्धि रोकने के लिए किया जा सकता है। (उदा.- डिटॉल, सेवलॉन, बोरिक एसिड)।
- बंध्याकरण / स्टेरलाइजेशन (Sterilization): वह प्रक्रिया जिसके द्वारा निर्जीव वस्तुओं से सभी प्रकार के सूक्ष्मजीवों और उनके बीजाणुओं (Spores) को शत-प्रतिशत नष्ट कर दिया जाता है। (उदा.- ऑटोक्लेव, उबलता पानी)।
3.2 विसंक्रमण की प्रमुख विधियाँ (Methods of Disinfection)
विसंक्रमण की प्रक्रियाओं को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जाता है:
A. भौतिक विधियाँ (Physical Methods):
- सूर्य का प्रकाश (Sunlight): प्राकृतिक एवं सबसे सस्ता विसंक्रामक। सूर्य की पराबैंगनी (Ultraviolet / UV) किरणें जीवाणुओं को नष्ट करती हैं। गद्दे, रजाई और कपड़ों को धूप में सुखाना अत्यंत प्रभावी है।
- शुष्क ताप (Dry Heat):
- जलाना (Incineration): संक्रमित पट्टियों, कचरे और थूकदान की सामग्री को जलाकर नष्ट करना।
- स्त्री करना (Ironing): गर्म प्रेस से कपड़ों के रोगाणु और उनके अंडे नष्ट होते हैं।
- आर्द्र ताप (Moisture Heat):
- उबालना (Boiling): जल को 100°C पर 20-30 मिनट तक उबालने से अधिकांश रोगाणु नष्ट हो जाते हैं। रोगी के बर्तन, सिरिंज और कांच के सामान का विसंक्रमण।
- भाप द्वारा (Steam under pressure): प्रेशर कुकर या ऑटोक्लेव (Autoclave) में 121°C ताप पर भाप द्वारा बंध्याकरण।
B. रासायनिक विधियाँ (Chemical Methods):
रासायनिक द्रवों, गैसों या पाउडर का उपयोग करके रोगाणुओं का नाश करना।
3.3 प्रमुख रासायनिक विसंक्रामक एवं उनके उपयोग
| विसंक्रामक का नाम | रूप / प्रकृति | प्रयोग की विधि एवं सांद्रता | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
| फिनाइल (Phenylic Compounds) | द्रव (Liquid) | जल में मिलाकर 2-5% घोल बनाएँ। | फर्श, शौचालय, नालियों और अस्पताल के कमरों की सफाई। |
| ब्लीचिंग पाउडर (Bleaching Powder) | चूर्ण (Calcium Hypochlorite) | क्लोरीन की गंध वाला सफेद पाउडर। | पेयजल के शोधन, नालियों, कुओं और थूकदानों के रोगाणुनाशन हेतु। |
| पोटेशियम परमैंगनेट (लाल दवा) | क्रिस्टल / दाने (KMnO₄) | हल्का गुलाबी घोल बनाएँ। | कुएँ के पानी को साफ करने, फल-सब्जियाँ धोने और घाव धोने में। |
| डिटॉल / सेवलॉन (Chloroxylenol) | द्रव (Liquid) | पानी में घोलकर (एंटीसेप्टिक)। | घाव की सफाई, स्नान का पानी, रोगी के वस्त्र धोने में। |
| फॉर्मेलिन / फॉर्मेल्डिहाइड गैस | द्रव / गैस (Formalin) | गैसीय धुँआ (Fumigation)। | रोगी के कमरों, ऑपरेशन थियेटर और बक्सों को बंद करके विसंक्रमित करना। |
| चूना (Lime / Quick Lime) | सफेद पाउडर | सूखा या सफेदी के रूप में। | कच्चे शौचालय, गंदगी वाले स्थानों तथा दीवारों पर सफेदी करने में। |
3.4 घर, वस्त्रों एवं रोगी के कक्ष का विसंक्रमण
किसी संक्रामक रोग से पीड़ित व्यक्ति की देखभाल के बाद घर को पूर्णतः सुरक्षित बनाने के लिए दो प्रकार का विसंक्रमण किया जाता है:
- समवर्ती विसंक्रमण (Concurrent Disinfection): रोगी के बीमार रहने के दौरान प्रतिदिन उसके मल, मूत्र, थूक, प्रयुक्त बर्तनों और बिस्तर का तुरंत एवं निरंतर विसंक्रमण करना।
- अंतिम विसंक्रमण (Terminal Disinfection): रोगी के पूर्णतः स्वस्थ हो जाने या अस्पताल स्थानांतरित होने के पश्चात उसके कमरे, फर्नीचर, वस्त्रों और बिस्तर का एकमुश्त गहन विसंक्रमण (जैसे- धूप दिखाना, फॉर्मेलिन से धूमन/Fumigation करना, फिनाइल से पोछा लगाना)।
भाग 4: प्राथमिक चिकित्सा एवं रोगी की देखभाल
संक्रामक रोगों के फैलाव को रोकने के लिए गृह विज्ञान के विद्यार्थियों को पृथक्करण (Isolation) और संगरोधावधि (Quarantine) का ज्ञान होना आवश्यक है:
- पृथक्करण (Isolation): संक्रामक रोगी को अन्य स्वस्थ व्यक्तियों से अलग कमरे में रखना ताकि रोगाणु दूसरों तक न पहुँच सकें।
- संगरोध (Quarantine): उन स्वस्थ व्यक्तियों की आवाजाही को सीमित करना जो किसी संक्रामक रोगी के संपर्क में आए हों, ताकि सम्प्राप्ति काल (Incubation Period) के दौरान रोग फैलने की संभावना समाप्त हो सके।
- ORS का घोल (Oral Rehydration Solution): हैजा या दस्त के दौरान शरीर में जल और लवणों की कमी (निर्जलीकरण) को पूरा करने के लिए 1 लीटर उबले पानी में 6 चम्मच चीनी और ½ चम्मच नमक मिलाकर पिलाना चाहिए।
भाग 5: बिहार बोर्ड क्वेश्चन बैंक (Question Bank)
5.1 VVI बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective MCQs)
-
BCG का टीका किस रोग से बचाव के लिए जन्म के समय लगाया जाता है?
(A) पोलिया
(B) क्षय रोग (टीबी)
(C) मियादी बुखार
(D) चेचक
उत्तर: (B) क्षय रोग (टीबी) -
निम्नलिखित में से कौन सा रोग जल एवं भोजन द्वारा संचालित होता है?
(A) मलेरिया
(B) टेटनस
(C) हैजा (Cholera)
(D) दाद
उत्तर: (C) हैजा (Cholera) -
माँ के प्रथम दूध (कोलोस्ट्रम) से नवजात शिशु को किस प्रकार की प्रतिरक्षा प्राप्त होती है?
(A) अक्रिय प्राकृतिक प्रतिरक्षा
(B) सक्रिय कृत्रिम प्रतिरक्षा
(C) अक्रिय कृत्रिम प्रतिरक्षा
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (A) अक्रिय प्राकृतिक प्रतिरक्षा -
मलेरिया रोग किस वाहक के काटने से फैलता है?
(A) घरेलू मक्खी
(B) मादा एडीज मच्छर
(C) मादा एनोफिलीज मच्छर
(D) क्यूलेक्स मच्छर
उत्तर: (C) मादा एनोफिलीज मच्छर -
'लॉक-जॉ' (Lock-jaw) अवस्था किस बीमारी का मुख्य लक्षण है?
(A) टिटनेस
(B) डिप्थीरिया
(C) पोलिया
(D) टाइफाइड
उत्तर: (A) टिटनेस -
पानी को रोगाणुरहित करने के लिए कौन से रसायन का उपयोग किया जाता है?
(A) फिनाइल
(B) ब्लीचिंग पाउडर / लाल दवा
(C) फॉर्मेलिन
(D) फॉर्मेल्डिहाइड
उत्तर: (B) ब्लीचिंग पाउडर / लाल दवा -
DPT का टीका किन तीन रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है?
(A) डिप्थीरिया, पेचिश, टिटनेस
(B) डिप्थीरिया, पर्टुसिस (काली खाँसी), टिटनेस
(C) डेंगू, पोलिया, टीबी
(D) डायरिया, पीलिया, टिटनेस
उत्तर: (B) डिप्थीरिया, पर्टुसिस (काली खाँसी), टिटनेस -
उद्भवन काल (Incubation Period) से आप क्या समझते हैं?
(A) बीमारी ठीक होने का समय
(B) रोगाणु प्रवेश से लक्षण दिखने तक का समय
(C) टीकाकरण का समय
(D) दवा खाने का समय
उत्तर: (B) रोगाणु प्रवेश से लक्षण दिखने तक का समय
5.2 लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 Marks)
प्र 1. संक्रामक रोग किसे कहते हैं? इसके दो उदाहरण दें।
उत्तर: वे रोग जो सूक्ष्म जीवाणुओं, विषाणुओं या परजीवियों द्वारा एक संक्रमित व्यक्ति या दूषित माध्यमों (जल, वायु, भोजन) से स्वस्थ व्यक्ति में फैलते हैं, उन्हें संक्रामक रोग कहते हैं। उदाहरण: हैजा, क्षय रोग (टीबी)।
प्र 2. प्राकृतिक और उपार्जित प्रतिरक्षा में दो मुख्य अंतर लिखें।
उत्तर: 1. प्राकृतिक प्रतिरक्षा जन्मजात होती है और आनुवंशिक रूप से मिलती है, जबकि उपार्जित प्रतिरक्षा जीवनकाल के दौरान रोग होने या टीकाकरण द्वारा अर्जित की जाती है। 2. प्राकृतिक प्रतिरक्षा सामान्य होती है, जबकि उपार्जित प्रतिरक्षा किसी विशेष रोगाणु के प्रति विशिष्ट होती है।
प्र 3. विसंक्रामक (Disinfectant) और एंटीसेप्टिक (Antiseptic) में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर: विसंक्रामक तेज रासायनिक पदार्थ होते हैं जिनका प्रयोग केवल निर्जीव वस्तुओं (जैसे फर्श, नाली, बर्तन) के रोगाणु नष्ट करने में होता है (जैसे फिनाइल)। जबकि एंटीसेप्टिक मृदु रसायन होते हैं जिनका प्रयोग सजीव त्वचा या घावों पर किया जाता है (जैसे डिटॉल)।
प्र 4. ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) बनाने की विधि तथा इसकी उपयोगिता बताएँ।
उत्तर: 1 लीटर उबले और ठंडे किए गए पानी में 6 चम्मच चीनी और ½ चम्मच नमक अच्छी तरह घोलकर ORS बनाया जाता है। यह हैजा या दस्त के दौरान शरीर में पानी व लवणों की कमी (निर्जलीकरण) को दूर करता है।
5.3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 Marks)
प्र 1. संक्रामक रोगों के संचरण (फैलाव) के विभिन्न प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष माध्यमों का विस्तार से वर्णन करें।
उत्तर: (उत्तर के लिए खंड 1.3 में दिए गए प्रत्यक्ष संचरण जैसे बूँद संक्रमण, त्वचा संपर्क तथा अप्रत्यक्ष संचरण जैसे दूषित जल/भोजन, मक्खियों-मच्छरों (वाहकों) और दूषित वस्तुओं द्वारा फैलाव का विस्तृत वर्णन करें।)
प्र 2. राष्ट्रीय टीकाकरण सारणी (National Immunization Schedule) का वर्णन करते हुए शिशुओं के लिए आवश्यक मुख्य टीकों के नाम, समय एवं संरक्षित रोगों की सूची बनाएँ।
उत्तर: (उत्तर के लिए खंड 2.6 की तालिका का उपयोग करते हुए जन्म से लेकर 5 वर्ष तक लगने वाले BCG, OPV, पेंटावेलेंट, MR और DPT टीकों का विस्तार से उल्लेख करें।)
प्र 3. विसंक्रमण (Disinfection) की भौतिक एवं रासायनिक विधियों का विस्तृत वर्णन कीजिए। दैनिक जीवन में इनका क्या महत्व है?
उत्तर: (उत्तर के लिए भाग 3 में वर्णित भौतिक विधियों — धूप, उबालना, शुष्क ताप तथा रासायनिक विधियों — फिनाइल, ब्लीचिंग पाउडर, फॉर्मेलिन, डिटॉल आदि का सविस्तार वर्णन करें।)
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