परिचय (Introduction)
पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता को बनाए रखने के लिए जनन (Reproduction) सबसे आवश्यक जैविक प्रक्रिया है। कोई भी जीव अमर नहीं है (एककोशिकीय जीवों को छोड़कर)। प्रत्येक जीव एक निश्चित समय तक जीवित रहता है और मृत्यु से पूर्व अपनी ही जैसी नई संतान को जन्म देता है।
1. जीवन अवधि (Life Span)
किसी जीव के जन्म से लेकर उसकी प्राकृतिक मृत्यु (Natural Death) तक के समय काल को उस जीव की जीवन अवधि (Life Span) कहते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- किसी जीव की जीवन अवधि उसके आकार पर निर्भर नहीं करती। (उदाहरण: कौआ और तोता दोनों का आकार लगभग समान होता है, लेकिन कौए की जीवन अवधि ~15 वर्ष और तोते की ~140 वर्ष होती है)।
- एककोशिकीय जीवों (जैसे- अमीबा, पैरामीशियम) को अमर माना जाता है क्योंकि वे प्राकृतिक रूप से मरने से पहले दो भागों में विभाजित होकर नए जीव बन जाते हैं।
विभिन्न जीवों की औसत जीवन अवधि:
- अमीबा: कुछ घंटे / दिन
- गुलाब का पौधा: 5 – 7 वर्ष
- कुत्ता: 15 – 20 वर्ष
- केला: 25 वर्ष
- गाय: 20 – 25 वर्ष
- हाथी: 60 – 70 वर्ष
- कछुआ: 100 – 150 वर्ष
- बरगद का वृक्ष: 200 – 300 वर्ष
2. जनन और इसके प्रकार (Reproduction & Its Types)
जनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने समान संतति (Offspring) उत्पन्न करता है। जनन के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं:
- अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
- लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
3. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
जब संतति की उत्पत्ति एकल जनक (Single Parent) द्वारा युग्मक (Gamete) के निर्माण के बिना होती है, तो उसे अलैंगिक जनन कहते हैं।
अलैंगिक जनन की मुख्य विशेषताएं:
- इसमें केवल एक जनक भाग लेता है।
- इसमें समसूत्री कोशिका विभाजन (Mitosis) होता है।
- इसमें युग्मक (Gametes) का निर्माण और संलयन (Fertilization) नहीं होता।
- इससे उत्पन्न संतति आनुवंशिक (Genetically) तथा आकारकीय (Morphologically) रूप से अपने जनक के बिल्कुल समान होती है। ऐसी संतति को क्लोन (Clone) कहा जाता है।
अलैंगिक जनन की मुख्य विधियाँ:
(i) विखंडन (Fission):
इसमें जनक कोशिका विभाजित होकर दो या दो से अधिक नई कोशिकाओं में बदल जाती है।
- द्विविखंडन (Binary Fission): जनक कोशिका दो बराबर भागों में बंटती है। (उदा. अमीबा, पैरामीशियम, लेश्मानिया)।
- बहुविखंडन (Multiple Fission): अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थितियों में जनक का केंद्रक कई भागों में विभाजित होकर कई संततियाँ बनाता है। (उदा. प्लाज्मोडियम)।
(ii) मुकुलन (Budding):
जनक के शरीर पर एक छोटा सा उभार (Bud/मुकुल) निकल आता है, जो धीरे-धीरे बड़ा होकर पृथक हो जाता है और नए जीव का निर्माण करता है।
- बहिर्जात मुकुलन (Exogenous Budding): ईस्ट (Yeast) तथा हाइड्रा (Hydra) में।
- अंतर्जात मुकुलन (Endogenous Budding): स्पंजों में बनने वाले 'जेम्यूल' (Gemmules)।
(iii) बीजाणु जनन (Sporulation):
विशेष सूक्ष्म संरचनाओं 'बीजाणु' (Spores) द्वारा जनन। जैसे—कवक और शैवाल में चलबीजाणु (Zoospores) बनते हैं जो कशाभिका (Flagella) द्वारा तैर सकते हैं। (उदा. क्लेमाइडोमोनास)।
(iv) खंडन (Fragmentation):
जीव का शरीर दो या अधिक खंडों में टूट जाता है और प्रत्येक खंड पुनरुद्भव (Regeneration) करके नया जीव बना लेता है। (उदा. स्पायरोगायरा)।
4. पौधों में कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)
पौधों के कायिक भागों (जैसे—जड़, तना, पत्ती) से नए पौधे के निर्माण की प्रक्रिया को कायिक प्रवर्धन कहते हैं। कायिक प्रवर्धन से बनने वाली संरचनाओं को कायिक प्रवर्ध (Vegetative Propagules) कहा जाता है।
प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन के उदाहरण:
- तनों द्वारा:
- प्रकंद (Rhizome): अदरक (Ginger), हल्दी।
- कंद (Tuber): आलू की आंख (Eye of Potato)।
- शलकंद (Bulb): प्याज, लहसुन।
- भूस्तारी (Runner/Offset): जलकुंभी (Water Hyacinth), दूब घास।
- पत्तियों द्वारा: ब्रायोफिलम (पत्थरचट्टा) की पत्तियों के किनारों पर उपस्थित कलिकाएं (Adventitious buds)।
- जड़ों द्वारा: शीशम, शकरकंद (Sweet Potato), डहेलिया।
'बंगाल का आतंक' (Terror of Bengal): जलकुंभी (Water Hyacinth / Eichhornia) एक जलीय पौधा है जो रुके हुए जल में बहुत तेजी से कायिक प्रवर्धन करता है। यह जल से ऑक्सीजन खींच लेता है, जिससे मछलियां मर जाती हैं। इसे ही 'बंगाल का आतंक' कहा जाता है।
5. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
जब संतति की उत्पत्ति में दो विपरीत लिंग वाले जनकों (नर तथा मादा) की भागीदारी होती है और इसमें नर तथा मादा युग्मकों (Gametes) का संलयन होता है, तो उसे लैंगिक जनन कहते हैं।
लैंगिक जनन की मुख्य विशेषताएं:
- यह एक जटिल, धीमी और विस्तृत प्रक्रिया है।
- इसमें अर्धसूत्री (Meiosis) तथा समसूत्री दोनों प्रकार के विभाजन होते हैं।
- इससे उत्पन्न संतति अपने जनकों से भिन्न होती है, जिससे **विभिन्नता (Variation)** उत्पन्न होती है जो विकास (Evolution) के लिए आवश्यक है।
जीवों के जीवन चक्र की अवस्थाएँ (Phases of Life Cycle):
- किशोरावस्था / कायिक प्रावस्था (Juvenile / Vegetative Phase): जन्म से लेकर जनन परिपक्वता प्राप्त करने से पहले तक की अवधि। पौधों में इसे 'कायिक प्रावस्था' कहते हैं।
- जनन प्रावस्था (Reproductive Phase): जब जीव जनन करने में सक्षम हो जाता है।
- मोनोकार्पिक पौधे (Monocarpic): जो जीवन में केवल एक बार पुष्प धारण करते हैं। (उदा. बांस की प्रजातियां जो 50-100 वर्षों में एक बार फूल देती हैं; नीलाकुरेंजी जो 12 वर्षों में एक बार खिलता है)।
- पॉलीकार्पिक पौधे (Polycarpic): जो प्रत्येक वर्ष एक निश्चित मौसम में फल-फूल देते हैं। (उदा. आम, सेब)।
- जीर्णावस्था / वृद्धावस्था (Senescent Phase): जनन क्षमता समाप्त होने के बाद की अवस्था, जो अंततः मृत्यु की ओर ले जाती है।
प्रजनकों के चक्र (Reproductive Cycles in Mammals):
- मदचक्र (Oestrus Cycle): नॉन-प्राइमेट स्तनधारियों (जैसे—गाय, भेड़, कुत्ता, चूहा, हिरण) में जनन काल के दौरान होने वाला चक्र।
- ऋतुस्राव चक्र / आर्तव चक्र (Menstrual Cycle): प्राइमेट स्तनधारियों (जैसे—मानव, बंदर, चिंपैंजी) में पाया जाने वाला प्रजनन चक्र।
6. लैंगिक जनन की घटनाएँ (Events in Sexual Reproduction)
सुविधा की दृष्टि से लैंगिक जनन की घटनाओं को तीन चरणों में विभाजित किया जाता है:
(1) निषेचन-पूर्व घटनाएँ (Pre-fertilization Events)
निषेचन (युग्मक संलयन) से पहले होने वाली सभी प्रक्रियाएं इसमें शामिल हैं।
A. युग्मकजनन (Gametogenesis):
अगुणित (n) युग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया को युग्मकजनन कहते हैं।
- समयुग्मकी (Isogametes): जब नर और मादा युग्मक देखने में एक समान हों और उन्हें पहचाना न जा सके। (उदा. क्लैडोफोरा शैवाल)।
- विषमयुग्मकी (Heterogametes): जब नर युग्मक (पुमणु/शुक्राणु) और मादा युग्मक (अंड/अंडाणु) आकारिकी रूप से भिन्न हों। (उदा. फ्यूकस, मानव)।
B. युग्मक स्थानांतरण (Gamete Transfer):
निषेचन के लिए नर और मादा युग्मकों का पास आना। निम्न श्रेणी के पौधों (शैवाल, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा) में जल युग्मक स्थानांतरण का माध्यम होता है। उच्च पौधों में यह क्रिया परागण (Pollination) द्वारा होती है।
(2) निषेचन (Fertilization / Syngamy)
नर युग्मक (n) तथा मादा युग्मक (n) के संलयन से द्विगुणित (2n) **युग्मनज (Zygote)** के निर्माण की प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं।
निषेचन के प्रकार:
- बाह्य निषेचन (External Fertilization): जब युग्मक संलयन जीव के शरीर के बाहर (पानी में) होता है। (उदा. अधिकांश शैवाल, मछलियां, उभयचर/मेढक)।
- आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization): जब युग्मक संलयन मादा जीव के शरीर के अंदर होता है। (उदा. कवक, सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी और अधिकांश पौधे)।
अनिषेकजनन (Parthenogenesis): वह प्रक्रिया जिसमें मादा युग्मक (अंडाणु) बिना निषेचन के ही नए जीव में विकसित हो जाता है। (उदाहरण: मधुमक्खी (ड्रोन), रोटिफर्स, छिपकली, टर्की पक्षी)।
(3) निषेचन-पश्च घटनाएँ (Post-fertilization Events)
युग्मनज (Zygote) बनने के बाद होने वाली सभी घटनाएँ इसके अंतर्गत आती हैं।
A. युग्मनज (Zygote):
यह सभी लैंगिक जनन करने वाले जीवों में पीढ़ियों के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी (Connecting Link) है जो प्रजाति की निरंतरता को सुनिश्चित करता है।
B. भ्रूणोद्भव (Embryogenesis):
युग्मनज (Zygote) से भ्रूण (Embryo) के विकास की प्रक्रिया को भ्रूणोद्भव कहते हैं। इसमें समसूत्री कोशिका विभाजन और कोशिका विभेदीकरण (Cell Differentiation) होता है।
अंडप्रजक एवं जरायुज जीव:
- अंडप्रजक (Oviparous): जो जीव निषेचित या अनिषेचित अंडे देते हैं और जिनका विकास शरीर के बाहर होता है। (उदा. पक्षी, सरीसृप)।
- जरायुज (Viviparous): जो जीव सीधे शिशु (बच्चे) को जन्म देते हैं। (उदा. मानव सहित अधिकांश स्तनधारी)।
पुष्पी पादपों में निषेचन के बाद होने वाले परिवर्तन:
- अंडाशय (Ovary) → फल (Fruit) में बदलता है।
- बीजांड (Ovule) → बीज (Seed) में बदलता है।
- अंडाशय की भित्ति → फलभित्ति (Pericarp) में बदलती है।
- बायदल, दलपुंज, पुंकेसर → मुरझाकर गिर जाते हैं।
7. बिहार बोर्ड परीक्षा - अति महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (BSEB VVI Questions)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)
- 'बंगाल का आतंक' किस जलीय पौधे को कहा जाता है?
उत्तर: जलकुंभी (Water Hyacinth) - बिना निषेचन के फल बनने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर: अनिषेकफलन (Parthenocarpy) - अदरक में कायिक प्रवर्धन किसके द्वारा होता है?
उत्तर: प्रकंद (Rhizome) द्वारा - तोते की संभावित जीवन अवधि कितनी होती है?
उत्तर: लगभग 140 वर्ष - निषेचन के बाद बीजांड (Ovule) किसमें परिवर्तित होता है?
उत्तर: बीज (Seed) में
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: कायिक प्रवर्धन से आप क्या समझते हैं? दो उदाहरण दें।
उत्तर: मातृ पौधे के कायिक अंगों (जैसे- जड़, तना, पत्ती) से बिना बीज के नया पौधा तैयार होने की प्रक्रिया को कायिक प्रवर्धन कहते हैं।
उदाहरण: 1. आलू के कंद में आँख द्वारा 2. ब्रायोफिलम की पत्ती की कलिकाओं द्वारा।
प्रश्न 2: क्लोन (Clone) किसे कहते हैं? अलैंगिक जनन से उत्पन्न संतति को क्लोन क्यों कहा जाता है?
उत्तर: आकारकीय (Morphological) एवं आनुवंशिक (Genetic) रूप से अपने जनक के पूर्णतः समान जीवों को क्लोन कहा जाता है। अलैंगिक जनन में केवल एक जनक भाग लेता है तथा समसूत्री विभाजन द्वारा कोशिकाएं बंटती हैं, जिससे आनुवंशिक भिन्नता उत्पन्न नहीं होती। इसलिए अलैंगिक जनन से उत्पन्न संतति को क्लोन कहते हैं।
प्रश्न 3: बाह्य निषेचन की क्या हानियां हैं?
उत्तर: बाह्य निषेचन की मुख्य हानियां निम्नलिखित हैं:
- नर एवं मादा युग्मकों का संलयन संयोग पर निर्भर करता है, जिससे अत्यधिक संख्या में युग्मकों का नुकसान होता है।
- उत्पन्न संततियों को शिकारियों से कोई सुरक्षा नहीं मिलती, जिससे उनकी उत्तरजीविता (Survival) का खतरा बना रहता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न: निषेचन-पूर्व घटनाओं की व्याख्या करें। युग्मकजनन और युग्मक स्थानांतरण को विस्तार से समझाएं।
उत्तर: निषेचन (युग्मकों के संलयन) से पूर्व होने वाली जैविक प्रक्रियाओं को निषेचन-पूर्व घटनाएँ कहते हैं। इसे दो भागों में बांटा जाता है:
1. युग्मकजनन (Gametogenesis): अगुणित (n) नर तथा मादा युग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया युग्मकजनन कहलाती है।
- यदि नर तथा मादा युग्मक आकार में समान हों, तो उन्हें समयुग्मकी (Isogametes) कहते हैं (उदा. क्लैडोफोरा शैवाल)।
- यदि वे भिन्न हों, तो उन्हें विषमयुग्मकी (Heterogametes) कहते हैं। नर युग्मक को शुक्राणु/पुमणु तथा मादा युग्मक को अंडाणु कहते हैं।
2. युग्मक स्थानांतरण (Gamete Transfer): युग्मकों के निर्माण के पश्चात् निषेचन को संपन्न करने के लिए नर और मादा युग्मकों का एक-दूसरे के निकट आना आवश्यक है।
- अधिकांश जीवों में नर युग्मक चलायमान (Motile) तथा मादा युग्मक अचल (Non-motile) होता है।
- निम्न पादपों में जल के माध्यम से युग्मक स्थानांतरण होता है।
- उच्च आवृत्तबीजी (Angiosperms) पौधों में परागकणों का परागकोष से वर्तिकाग्र तक पहुँचना **परागण (Pollination)** द्वारा संपन्न होता है।
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