1. परिचय एवं विलयन के प्रकार (Introduction and Types of Solutions)
दो या दो से अधिक पदार्थों के समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) को विलयन (Solution) कहते हैं। समांगी मिश्रण का अर्थ है कि मिश्रण के प्रत्येक भाग का संगठन और गुण समान होते हैं।
विलयन के घटक (Components of Solution):
- विलेय (Solute): विलयन में जो घटक कम मात्रा में उपस्थित रहता है, उसे विलेय कहते हैं (जैसे- नमक, चीनी)।
- विलायक (Solvent): विलयन में जो घटक अधिक मात्रा में उपस्थित रहता है, उसे विलायक कहते हैं (जैसे- जल)।
जिस विलयन में केवल दो घटक होते हैं, उसे द्विअंगी विलयन (Binary Solution) कहते हैं।
भौतिक अवस्था के आधार पर विलयन के प्रकार:
- गैसीय विलयन (Gaseous Solutions): विलायक गैस होता है (उदा. वायु, नाइट्रोजन में कपूर)।
- द्रव विलयन (Liquid Solutions): विलायक द्रव होता है (उदा. जल में इथेनॉल, जल में ग्लूकोज)।
- ठोस विलयन (Solid Solutions): विलायक ठोस होता है (उदा. तांबे में सोना, पैलेडियम में हाइड्रोजन गैस)।
2. विलयन की सांद्रता को व्यक्त करने की विधियां (Expressing Concentration of Solutions)
किसी विलयन की निश्चित मात्रा में उपस्थित विलेय की मात्रा को उस विलयन की **सांद्रता (Concentration)** कहते हैं।
1. द्रव्यमान प्रतिशत (Mass Percentage - % w/w):
100 ग्राम विलयन में उपस्थित विलेय का द्रव्यमान।
द्रव्यमान % = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का कुल द्रव्यमान) × 100
2. आयतन प्रतिशत (Volume Percentage - % v/v):
100 एमएल विलयन में उपस्थित विलेय का आयतन।
आयतन % = (विलेय का आयतन / विलयन का कुल आयतन) × 100
3. मोल अंश / मोल भिन्न (Mole Fraction - χ):
किसी घटक के मोलों की संख्या तथा विलयन में उपस्थित सभी घटकों के कुल मोलों की संख्या के अनुपात को मोल अंश कहते हैं।
यदि विलेय के मोल nA तथा विलायक के मोल nB हों:
विलेय का मोल अंश (χA) = nA / (nA + nB) विलायक का मोल अंश (χB) = nB / (nA + nB) नोट: χA + χB = 1
4. मोलरता (Molarity - M):
1 लीटर (1000 mL) विलयन में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को **मोलरता** कहते हैं।
मोलरता (M) = विलेय के मोल / विलयन का आयतन (लीटर में) मात्रक: मोल/लीटर (mol/L) नोट: मोलरता ताप पर निर्भर करती है (ताप बढ़ाने पर मोलरता घटती है)।
5. मोललता (Molality - m):
1 किलोग्राम (1000 ग्राम) विलायक में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को **मोललता** कहते हैं।
मोललता (m) = विलेय के मोल / विलायक का द्रव्यमान (kg में) मात्रक: मोल/किग्रा (mol/kg) नोट: मोललता ताप पर निर्भर नहीं करती क्योंकि इसमें द्रव्यमान शामिल है।
6. पीपीएम (Parts Per Million - ppm):
जब विलेय की मात्रा बहुत सूक्ष्म हो, तब सांद्रता ppm में व्यक्त की जाती है।
3. विलेयता एवं हेनरी का नियम (Solubility & Henry's Law)
विलेयता (Solubility):
निश्चित ताप पर 100 ग्राम विलायक में विलेय की अधिकतम घुली हुई मात्रा को उसकी विलेयता कहते हैं।
गैसों की द्रव में विलेयता पर दाब का प्रभाव - हेनरी का नियम (Henry's Law):
स्थिर ताप पर किसी द्रव में गैस की विलेयता (या गैस का आंशिक दाब) उस द्रव की सतह पर लगने वाले गैस के दाब के समानुपाती होती है।
P ∛ χ => P = KH · χ
यहाँ:
- P = गैस का आंशिक दाब
- χ = विलयन में गैस का मोल अंश
- KH = हेनरी नियम स्थिरांक
हेनरी के नियम के अनुप्रयोग:
- सोडा वाटर या शीतल पेयों (Cold Drinks) में CO2 की विलेयता बढ़ाने के लिए बोतल को उच्च दाब पर बंद किया जाता है।
- गहरे समुद्र में गोताखोरों (Scuba Divers) को 'बेंड्स' (Bends) नामक जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए सिलेंडरों में हीलियम गैस मिलाई जाती है।
- अत्यधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन का आंशिक दाब कम होने से 'ऐनॉक्सिया' (Anoxia - सोचने की क्षमता कम होना) नामक बीमारी होती है।
4. वाष्प दाब एवं राऊल्ट का नियम (Vapour Pressure & Raoult's Law)
वाष्प दाब (Vapour Pressure):
स्थिर ताप पर साम्यावस्था में किसी द्रव की सतह पर उसकी वाष्प द्वारा डाला गया दाब वाष्प दाब कहलाता है।
राऊल्ट का नियम (Raoult's Law):
(A) वाष्पशील द्रवों के विलयन के लिए:
किसी ताप पर वाष्पशील द्रवों के विलयन में प्रत्येक घटक का आंशिक वाष्प दाब उसके मोल अंश के समानुपाती होता है।
PA = P°A · χA PB = P°B · χB कुल दाब Ptotal = PA + PB = P°AχA + P°BχB
(B) अवाष्पशील विलेय वाले विलयन के लिए:
अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलायक के वाष्प दाब में आपेक्षित अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है।
(P°A - PA) / P°A = χB
5. आदर्श एवं अनादर्श विलयन (Ideal & Non-ideal Solutions)
| गुण | आदर्श विलयन (Ideal Solution) | अनादर्श विलयन (Non-ideal Solution) |
|---|---|---|
| राऊल्ट का नियम | सभी सांद्रताओं पर पालन करता है। | राऊल्ट के नियम का पालन नहीं करता। |
| ΔHmixing (मिक्सिंग एंथैल्पी) | ΔH = 0 (ऊष्मा न निकलती है, न अवशोषित होती है)। | ΔH ≠ 0 |
| ΔVmixing (आयतन परिवर्तन) | ΔV = 0 (आयतन में कोई परिवर्तन नहीं)। | ΔV ≠ 0 |
| आकर्षण बल | A-B आकर्षण = A-A या B-B आकर्षण। | A-B आकर्षण ≠ A-A या B-B आकर्षण। |
| उदाहरण | n-हेक्सेन + n-हेप्टेन, बेंजीन + टोल्यून। | इथेनॉल + एसीटोन, क्लोरोफॉर्म + एसीटोन। |
स्थिरक्वाथी मिश्रण (Azeotropes):
दो द्रवों का ऐसा द्विअंगी मिश्रण जो एक निश्चित ताप पर बिना अपने संगठन में परिवर्तन किए उबलता है, उसे स्थिरक्वाथी कहते हैं।
- न्यूनतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी: जो धनात्मक विचलन दर्शाते हैं (उदा. 95% इथेनॉल + 5% जल)।
- अधिकतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी: जो ऋणात्मक विचलन दर्शाते हैं (उदा. 68% HNO3 + 32% जल)।
6. विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative Properties)
विलयन के वे गुण जो केवल विलेय के **कणों की संख्या** पर निर्भर करते हैं, न कि विलेय की प्रकृति पर, उन्हें अणुसंख्यक गुणधर्म कहते हैं।
मुख्य रूप से 4 अणुसंख्यक गुणधर्म हैं:
1. वाष्प दाब का आपेक्षित अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure):
विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब में कमी आती है।
(P° - P) / P° = n / (n + N) ≈ Wb × Ma / (Mb × Wa)
2. क्वथनांक का उन्नयन (Elevation of Boiling Point - ΔTb):
अवाष्पशील विलेय मिलाने से विलयन का क्वथनांक बढ़ जाता है।
ΔTb = Tb - T°b ΔTb ∛ m (मोललता) => ΔTb = Kb · m ΔTb = (Kb × Wb × 1000) / (Mb × Wa)
यहाँ Kb = मोलल उन्नयन स्थिरांक (Ebullioscopic constant)।
3. हिमांक का अवनमन (Depression of Freezing Point - ΔTf):
अवाष्पशील विलेय मिलाने पर हिमांक में कमी आती है।
ΔTf = T°f - Tf ΔTf ∛ m => ΔTf = Kf · m ΔTf = (Kf × Wb × 1000) / (Mb × Wa)
यहाँ Kf = मोलल अवनमन स्थिरांक (Cryoscopic constant)।
4. परासरण दाब (Osmotic Pressure - π):
- परासरण (Osmosis): अर्धपारगम्य झिल्ली (SPM) से होकर विलायक के अणुओं का कम सांद्रता से अधिक सांद्रता वाले विलयन की ओर प्रवाह।
- परासरण दाब (π): परासरण की क्रिया को रोकने के लिए विलयन पर लगाया गया न्यूनतम बाह्य दाब।
π = CRT = (n/V) · R · T
परासरण दाब के आधार पर विलयन के प्रकार:
- समपरासारी (Isotonic): जिन दो विलयनों का परासरण दाब समान हो (उदा. 0.9% NaCl विलयन मानव रक्त कोशिका के समपरासारी होता है)।
- अतिपरासारी (Hypertonic): जिसका परासरण दाब अधिक हो (इसमें कोशिका सिकुड़ जाती है)।
- अल्पपरासारी (Hypotonic): जिसका परासरण दाब कम हो (इसमें कोशिका फूलकर फट जाती है)।
7. वांट हॉफ कारक (Van't Hoff Factor - i)
जब विलेय विलयन में संगुणित (Associate) या वियोजित (Dissociate) होता है, तो उसके अणुसंख्यक गुणधर्म बदल जाते हैं। इसे संशोधित करने के लिए वांट हॉफ ने एक कारक **'i'** दिया।
i = (सामान्य मोलर द्रव्यमान) / (प्रेक्षित मोलर द्रव्यमान) = (वियोजन या संगणन के बाद कणों की संख्या) / (प्रारंभिक कणों की संख्या)
- वियोजन के लिए (जैसे- NaCl → Na+ + Cl-): **i > 1**
- संगुणन के लिए (जैसे- एसिटिक एसिड का डाइमर बनना): **i < 1**
- न वियोजन न संगुणन (जैसे- ग्लूकोज, यूरिया): **i = 1**
8. बिहार बोर्ड परीक्षा - अति महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (BSEB VVI Questions)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)
- निम्नलिखित में से कौन सा ताप पर निर्भर नहीं करता है?
उत्तर: मोललता (Molality) - गोताखोरों द्वारा सांस लेने वाले सिलेंडर में कौन सी गैस मिलाई जाती है?
उत्तर: हीलियम (He) - मानव रक्त कोशिका के समपरासारी NaCl विलयन की सांद्रता कितनी होती है?
उत्तर: 0.9% (w/v) - राऊल्ट का नियम किससे संबंधित है?
उत्तर: वाष्प दाब (Vapour Pressure) - NaCl के लिए वांत हॉफ कारक (i) का मान क्या होगा (पूर्ण वियोजन पर)?
उत्तर: 2
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: मोलरता और मोललता में दो मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
- मोलरता (M): यह 1 लीटर **विलयन** में विलेय के मोलों की संख्या है। यह ताप बदलने से बदलती है।
- मोललता (m): यह 1 किग्रा **विलायक** में विलेय के मोलों की संख्या है। यह ताप पर निर्भर नहीं करती।
प्रश्न 2: हेनरी का नियम लिखिए तथा इसके दो मुख्य अनुप्रयोग बताएं।
उत्तर: स्थिर ताप पर किसी द्रव में गैस की विलेयता उस पर लगने वाले आंशिक दाब के समानुपाती होती है (P = KH · χ)।
अनुप्रयोग: 1. सोडा वाटर की बोतल को उच्च दाब पर बंद करना। 2. गोताखोरों के सिलेंडर में हीलियम मिलाना।
प्रश्न 3: उल्टे परासरण (Reverse Osmosis - RO) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: यदि विलयन पर उसके परासरण दाब से अधिक बाह्य दाब लगाया जाए, तो विलायक के अणु अधिक सांद्रता वाले विलयन से SPM द्वारा शुद्ध विलायक की ओर प्रवाहित होने लगते हैं। इसे उल्टा परासरण (RO) कहते हैं। इसका उपयोग **समुद्री जल के विलवणीकरण (Desalination)** में होता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न: अणुसंख्यक गुणधर्म क्या हैं? सिद्ध करें कि क्वथनांक का उन्नयन एक अणुसंख्यक गुणधर्म है तथा इससे विलेय का आणविक द्रव्यमान ज्ञात करने का सूत्र व्युत्पन्न करें।
उत्तर:
अणुसंख्यक गुणधर्म: विलयन के वे भौतिक गुण जो विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, अणुसंख्यक गुणधर्म कहलाते हैं।
व्याख्या: जब किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाया जाता है, तो वाष्प दाब घट जाता है जिससे विलयन को उबलने के लिए अधिक ताप की आवश्यकता होती है। प्रयोगों द्वारा सिद्ध हुआ है कि क्वथनांक का उन्नयन (ΔTb) विलेय की मोललता (m) के समानुपाती होता है:
ΔTb ∛ m ΔTb = Kb · m
चूंकि मोललता (m) विलेय कणों की संख्या (मोलों) से संबंधित है, अतः **ΔTb एक अणुसंख्यक गुणधर्म है।**
आणविक द्रव्यमान (Mb) की गणना का सूत्र:
m = (Wb × 1000) / (Mb × Wa) ΔTb = (Kb × Wb × 1000) / (Mb × Wa) => Mb = (Kb × Wb × 1000) / (ΔTb × Wa)
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