Bihar Board Class 12th Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi: रासायनिक बलगतिकी (Chemical Kinetics)

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं केमिस्ट्री अध्याय 4 (रासायनिक बलगतिकी) के आसान और विस्तृत नोट्स। परीक्षा की तैयारी के लिए मुख्य सूत्र, व्यंजक, नियम और Board VVI Q&A।

Bihar Board Class 12th Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi: रासायनिक बलगतिकी (Chemical Kinetics)

1. परिचय (Introduction)

रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत **रासायनिक अभिक्रियाओं की दर (Rate of Reaction)**, उनको प्रभावित करने वाले कारकों तथा उनकी **क्रियाविधि (Mechanism)** का अध्ययन किया जाता है, उसे रासायनिक बलगतिकी (Chemical Kinetics) कहते हैं।

अभिक्रियाओं के प्रकार (गति के आधार पर):

  • तीव्र / तात्कालिक अभिक्रियाएँ (Fast Reactions): ये अभिक्रियाएँ पलक झपकते (10-14 से 10-16 सेकंड में) संपन्न हो जाती हैं। उदाहरण: आयनिक अभिक्रियाएँ (जैसे- AgNO3 + NaCl → AgCl↓ + NaNO3)। इनका वेग मापना कठिन है।
  • अति मंद अभिक्रियाएँ (Very Slow Reactions): इन्हें पूरा होने में दिनों, महीनों या वर्षों का समय लगता है। उदाहरण: लोहे में जंग लगना।
  • मंद / मध्यम अभिक्रियाएँ (Moderate Reactions): इनकी गति मापने योग्य होती है। उदाहरण: इक्षु-शर्करा (Cane Sugar) का जल-अपघटन, H2O2 का अपघटन।

2. रासायनिक अभिक्रिया का वेग (Rate of Chemical Reaction)

इकाई समय में किसी अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में होने वाले परिवर्तन को अभिक्रिया का वेग (Rate of Reaction) कहते हैं।

अभिक्रिया का वेग = (सांद्रता में परिवर्तन) / (लिया गया समय)
मात्रक = मोल लीटर-1 सेकंड-1 (mol L-1 s-1 या M s-1)

किसी सामान्य अभिक्रिया: A → B के लिए:

  • अभिकारक A के लुप्त होने की दर: - Δ[A] / Δt (ऋणात्मक चिह्न सांद्रता में कमी दर्शाता है)
  • उत्पाद B के बनने की दर: + Δ[B] / Δt

औसत वेग एवं तात्क्षणिक वेग:

  • औसत वेग (Average Rate - Ravg): समय के एक निश्चित अंतराल में सांद्रता में परिवर्तन (ΔC / Δt)।
  • तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Rate - Rinst): किसी विशेष क्षण (dt → 0) पर अभिक्रिया का वेग (d[C] / dt)।

3. अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Rate of Reaction)

  1. अभिकारकों की सांद्रता: सांद्रता बढ़ाने पर अणुओं के बीच टक्करों की संख्या बढ़ती है, जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ता है।
  2. ताप का प्रभाव: ताप बढ़ाने पर अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ती है। सामान्यतः 10°C ताप बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग 2 से 3 गुना बढ़ जाता है।
  3. उत्प्रेरक की उपस्थिति: उत्प्रेरक सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को कम करके अभिक्रिया के वेग को बढ़ा देता है।
  4. पृष्ठीय क्षेत्रफल: ठोस अभिकारकों का पृष्ठीय क्षेत्रफल जितना अधिक होगा (बारीक चूर्ण रूप में), अभिक्रिया का वेग उतना ही अधिक होगा।
  5. प्रकाश का प्रभाव: कुछ प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाएँ (जैसे- H2 + Cl2 → 2HCl) केवल प्रकाश की उपस्थिति में ही तीव्र गति से होती हैं।

4. द्रव्यमान अनुपाती क्रिया का नियम एवं वेग नियम (Rate Law)

द्रव्यमान अनुपाती क्रिया का नियम (Law of Mass Action):

गुलडबर्ग तथा वागे के अनुसार, स्थिर ताप पर किसी अभिक्रिया का वेग अभिकारकों की सांद्रता के समानुपाती होता है।

वेग नियम या वेग व्यंजक (Rate Law / Rate Equation):

यह एक ऐसा गणितीय व्यंजक है जो प्रयोगों द्वारा निर्धारित अभिकारकों की सांद्रता पर अभिक्रिया के वेग की निर्भरता को दर्शाता है।

अभिक्रिया aA + bB → Products के लिए:

Rate (R) = k [A]x [B]y

यहाँ:

  • k = वेग स्थिरांक (Rate Constant) / विशिष्ट अभिक्रिया वेग
  • x एवं y प्रयोगों द्वारा ज्ञात किए गए घातांक हैं (जो a और b के बराबर हो भी सकते हैं और नहीं भी)।


5. अभिक्रिया की कोटि एवं आणविकता (Order & Molecularity of Reaction)

1. अभिक्रिया की कोटि (Order of Reaction):

किसी अभिक्रिया के प्रयोग द्वारा निर्धारित वेग नियम समीकरण में अभिकारकों की सांद्रताओं की घातों के योग को अभिक्रिया की कोटि कहते हैं।

यदि Rate = k [A]x [B]y, तो कुल कोटि (n) = x + y
  • यह एक **प्रायोगिक मान (Experimental Value)** है।
  • यह शून्य, पूर्णांक, ऋणात्मक या भिन्नात्मक (Fractional) हो सकती है।

2. अभिक्रिया की आणविकता (Molecularity of Reaction):

किसी प्राथमिक (Elementary) अभिक्रिया में एक साथ भाग लेकर आपस में टकराने वाले अभिकारक अणुओं, परमाणुओं या आयनों की संख्या को **अभिक्रिया की आणविकता** कहते हैं।

  • यह एक **सैद्धांतिक मान (Theoretical Value)** है।
  • यह केवल एक धनात्मक पूर्णांक (1, 2, 3) हो सकती है। यह कभी भी शून्य, ऋणात्मक या भिन्नात्मक नहीं हो सकती।

अंतर सारणी (Difference between Order & Molecularity):

गुण अभिक्रिया की कोटि (Order) अभिक्रिया की आणविकता (Molecularity)
प्रकृति यह प्रयोगों द्वारा निर्धारित होती है। यह एक सैद्धांतिक अवधारणा है।
मान शून्य, भिन्न, पूर्णांक या ऋणात्मक हो सकती है। सदैव एक धनात्मक पूर्ण संख्या (1, 2, 3) होती है।
क्रियाविधि यह जटिल अभिक्रियाओं के लिए भी मान्य है। यह केवल प्राथमिक अभिक्रियाओं के लिए अर्थपूर्ण है।

6. समाकलित वेग समीकरण (Integrated Rate Equations)

(A) शून्य कोटि की अभिक्रिया (Zero Order Reaction):

वह अभिक्रिया जिसका वेग अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भर नहीं करता है।

Rate = k [A]0 = k

समाकलित वेग व्यंजक:

k = ([A]0 - [A]) / t

अर्ध-आयु काल (Half-life Period - t1/2):

वह समय जिसमें किसी अभिकारक की सांद्रता घटकर अपनी प्रारंभिक सांद्रता की आधी रह जाती है।

t1/2 = [A]0 / (2k)

निष्कर्ष: शून्य कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल प्रारंभिक सांद्रता [A]0 के समानुपाती होता है।

(B) प्रथम कोटि की अभिक्रिया (First Order Reaction):

वह अभिक्रिया जिसका वेग अभिकारक की सांद्रता की प्रथम घात के समानुपाती होता है।

Rate = k [A]1

समाकलित वेग व्यंजक:

k = (2.303 / t) · log10 ([A]0 / [A])

या (प्रारंभिक सांद्रता 'a' तथा t समय बाद 'a-x' मानने पर):

k = (2.303 / t) · log10 (a / (a - x))

अर्ध-आयु काल (t1/2):

t1/2 = 0.693 / k

निष्कर्ष: प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करता है। (यह बिहार बोर्ड परीक्षा का अति-पसंदीदा प्रश्न है)।

छद्म / कूट प्रथम कोटि की अभिक्रिया (Pseudo First Order Reaction):

ऐसी अभिक्रियाएँ जिनकी आणविकता दो या अधिक होती है, परंतु प्रयोगों में वे प्रथम कोटि की बलगतिकी का पालन करती हैं।

उदाहरण: इक्षु-शर्करा का जल-अपघटन:
C12H22O11 + H2O (आधिक्य) → C6H12O6 + C6H12O6
यहाँ जल अत्यधिक मात्रा में होने के कारण इसकी सांद्रता में परिवर्तन नगण्य माना जाता है, अतः Rate = k [C12H22O11]।


7. ताप की निर्भरता एवं आरहेनियस समीकरण (Arrhenius Equation)

सीडिश रसायनज्ञ स्वांते आरहेनियस ने ताप और वेग स्थिरांक के बीच संबंध दर्शाने के लिए एक समीकरण दिया:

k = A · e-Ea / RT

दोनों ओर प्राकृतिक लघुगणक (ln) लेने पर लघुगणकीय रूप:

log10 k = log10 A - Ea / (2.303 R T)

दो भिन्न तापों T1 तथा T2 पर वेग स्थिरांक k1 तथा k2 के लिए:

log10 (k2 / k1) = (Ea / 2.303 R) · [(T2 - T1) / (T1 · T2)]

यहाँ:

  • k = वेग स्थिरांक
  • A = आरहेनियस कारक / आवृत्ति कारक (Frequency Factor)
  • Ea = **सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy)**
  • R = गैस स्थिरांक (8.314 J K-1 mol-1)
  • T = परम ताप (Kelvin में)

सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy - Ea) क्या है?
अभिकारक अणुओं के पास उत्पाद में बदलने के लिए आवश्यक न्यूनतम अतिरिक्त ऊर्जा को सक्रियण ऊर्जा कहते हैं। (सक्रियण ऊर्जा = देहली ऊर्जा - सामान्य अणुओं की औसत ऊर्जा)।

8. रासायनिक अभिक्रियाओं का संघट्ट सिद्धांत (Collision Theory)

यह सिद्धांत **मैक्स ट्रौत्ज़ और विलियम लुईस** द्वारा प्रतिपादित किया गया था।

  • अभिक्रिया होने के लिए अभिकारक अणुओं का आपस में टकराना (Collision) आवश्यक है।
  • प्रति इकाई आयतन में प्रति सेकंड होने वाली टक्करों की संख्या को **संघट्ट आवृत्ति (Collision Frequency - Z)** कहते हैं।
  • सभी टक्करों से उत्पाद नहीं बनते। केवल वही टक्करें प्रभावी (Effective Collisions) होती हैं जिनके पास **न्यूनतम देहली ऊर्जा (Threshold Energy)** और **उचित अभिविन्यास (Proper Orientation)** होता है।
Rate = P · ZAB · e-Ea / RT

(यहाँ P = स्टेरिक कारक या प्रायिकता कारक है)।


9. बिहार बोर्ड परीक्षा - अति महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (BSEB VVI Questions)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)

  1. प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल (t1/2) का सूत्र क्या होता है?
    उत्तर: t1/2 = 0.693 / k
  2. शून्य कोटि अभिक्रिया के वेग स्थिरांक (k) का मात्रक क्या है?
    उत्तर: mol L-1 s-1
  3. प्रथम कोटि अभिक्रिया के वेग स्थिरांक का मात्रक क्या होता है?
    उत्तर: s-1 (या time-1)
  4. यदि किसी अभिक्रिया का ताप 10°C बढ़ा दिया जाए, तो वेग स्थिरांक लगभग कितना हो जाता है?
    उत्तर: 2 से 3 गुना
  5. आरहेनियस समीकरण में Ea क्या निरूपित करता है?
    उत्तर: सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy)

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: अभिक्रिया की कोटि और आणविकता में दो मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:

  • कोटि: यह एक प्रायोगिक मान है जो शून्य, भिन्नात्मक या ऋणात्मक हो सकता है।
  • आणविकता: यह एक सैद्धांतिक मान है जो केवल धनात्मक पूर्णांक (1, 2, 3) ही हो सकता है।

प्रश्न 2: सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: अभिकारक अणुओं को उत्पाद में परिवर्तित होने के लिए सामान्य अवस्था से ऊपर जिस न्यूनतम अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उसे सक्रियण ऊर्जा (Ea) कहते हैं।

प्रश्न 3: छद्म (कूट) प्रथम कोटि की अभिक्रिया क्या है? एक उदाहरण दें।
उत्तर: ऐसी अभिक्रियाएँ जिनकी आणविकता दो या अधिक होती है, परंतु अभिक्रिया का वेग केवल एक अभिकारक की सांद्रता पर निर्भर करता है, उन्हें छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण: एथिल एसीटेट का अम्लीय जल-अपघटन: CH3COOC2H5 + H2O → CH3COOH + C2H5OH।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न: प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए समाकलित वेग व्यंजक (Integrated Rate Equation) स्थापित करें तथा सिद्ध करें कि इसका अर्ध-आयु काल प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करता।
उत्तर:

माना कि एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है: A → Products

माना प्रारंभिक समय t = 0 पर A की सांद्रता = [A]0 = a
t समय बाद A की सांद्रता = [A] = (a - x)

प्रथम कोटि के नियम से, अभिक्रिया का वेग:

- d[A] / dt = k [A]
=> - d[A] / [A] = k · dt

दोनों तरफ समाकलन (Integration) करने पर:

- ln [A] = k · t + C  --- (समीकरण 1)

प्रारंभिक शर्त लागू करने पर (जब t = 0, तब [A] = [A]0):

- ln [A]0 = C

C का मान समीकरण 1 में रखने पर:

- ln [A] = k · t - ln [A]0
=> k · t = ln [A]0 - ln [A]
=> k · t = ln ([A]0 / [A])
=> k = (2.303 / t) · log10 ([A]0 / [A])

अर्ध-आयु काल (t1/2) के लिए व्यंजक:

जब t = t1/2, तब [A] = [A]0 / 2

k = (2.303 / t1/2) · log10 ([A]0 / ([A]0 / 2))
=> k = (2.303 / t1/2) · log10 (2)
=> k = (2.303 × 0.3010) / t1/2
=> k = 0.693 / t1/2
=> t1/2 = 0.693 / k

निष्कर्ष: इस समीकरण में प्रारंभिक सांद्रता [A]0 का कोई पद मौजूद नहीं है, अतः सिद्ध होता है कि **प्रथम कोटि की अभिक्रिया का अर्ध-आयु काल प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करता है।**

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