1. परिचय (Introduction)
रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में तथा विद्युत ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तन एवं उनके संबंधों का अध्ययन किया जाता है, उसे वैद्युतरसायन (Electrochemistry) कहते हैं।
चालक एवं उनके प्रकार (Conductors):
- धात्विक/इलेक्ट्रॉनी चालक (Metallic Conductors): वे पदार्थ जिनमें विद्युत धारा का प्रवाह इलेक्ट्रॉनों की गति के कारण होता है (उदा. तांबा, लोहा, एल्युमिनियम)। इसमें कोई रासायनिक परिवर्तन नहीं होता तथा ताप बढ़ाने पर प्रतिरोध बढ़ता है।
- वैद्युत अपघटनी चालक (Electrolytic Conductors): वे पदार्थ जो जलीय विलयन या गालित अवस्था में आयनों में विभक्त होकर विद्युत धारा प्रवाहित करते हैं (उदा. NaCl, HCl, NaOH)। इसमें ताप बढ़ाने पर चालकता बढ़ती है।
2. विद्युत अपघटनी विलयन का चालकतत्व (Conducted Concepts & Formulas)
(1) ओम का नियम (Ohm's Law):
किसी चालक के सिरों पर लगाया गया विभवांतर (V) उसमें प्रवाहित धारा (I) के समानुपाती होता है।
V = I · R => R = V / I
(2) प्रतिरोधकता या विशिष्ट प्रतिरोध (Resistivity / Specific Resistance - ρ):
किसी चालक का प्रतिरोध (R) उसकी लंबाई (l) के समानुपाती तथा अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
R ∛ l / A => R = ρ · (l / A)
मात्रक: ओम-सेमी (Ω cm) या ओम-मीटर (Ω m)
(3) विशिष्ट चालकता या कप्पा (Specific Conductance / Conductivity - θ / κ):
विशिष्ट प्रतिरोध के व्युत्क्रम को **विशिष्ट चालकता (κ - Kappa)** कहते हैं।
κ = 1 / ρ = (1 / R) · (l / A) = G · G*
यहाँ G* = l / A को सेल स्थिरांक (Cell Constant) कहते हैं।
मात्रक: S cm-1 (सीमेंस प्रति सेमी) या Ω-1 cm-1
(4) मोलर चालकता (Molar Conductivity - Ξm):
1 मोल वैद्युत अपघट्य वाले विलयन की चालकता को मोलर चालकता कहते हैं।
Ξm = (κ × 1000) / M
यहाँ M = विलयन की मोलरता (Molarity)।
मात्रक: S cm2 mol-1
(5) तुल्यांकी चालकता (Equivalent Conductivity - Ξeq):
1 ग्राम तुल्यांक वैद्युत अपघट्य वाले विलयन की चालकता को तुल्यांकी चालकता कहते हैं।
Ξeq = (κ × 1000) / N
यहाँ N = विलयन की सामान्यता (Normality)।
तनुता (Dilution) का प्रभाव: तनुता बढ़ाने पर (पानी मिलाने पर) आयनों की गतिशीलता बढ़ने के कारण **मोलर चालकता और तुल्यांकी चालकता बढ़ती है**, परंतु प्रति इकाई आयतन में आयनों की संख्या घटने के कारण **विशिष्ट चालकता (κ) घटती है**।
3. कोलराऊश का नियम (Kohlrausch's Law)
अनंत तनुता पर किसी वैद्युत अपघट्य की मोलर चालकता उसके सभी धनायनों तथा ऋणायनों की सीमांत मोलर चालकताओं के योग के बराबर होती है।
Ξ°m = ν+ λ°+ + ν- λ°-
उदाहरण (NaCl के लिए): Ξ°m(NaCl) = λ°(Na+) + λ°(Cl-)
कोलराऊश के नियम के अनुप्रयोग:
- दुर्बल वैद्युत अपघट्यों (जैसे- CH3COOH) की अनंत तनुता पर मोलर चालकता ज्ञात करना।
- दुर्बल वैद्युत अपघट्यों के वियोजन की मात्रा (α) की गणना करना:
α = Ξm / Ξ°m
- अल्प विलेय लवणों की विलेयता ज्ञात करना।
4. फैराडे के विद्युत अपघटन के नियम (Faraday's Laws of Electrolysis)
1. फैराडे का प्रथम नियम (First Law):
विद्युत अपघटन की क्रिया में किसी इलेक्ट्रोड पर मुक्त या निक्षेपित पदार्थ का द्रव्यमान (w) उसमें प्रवाहित विद्युत आवेश (Q) के समानुपाती होता है।
w ∛ Q => w = Z · Q = Z · I · t
यहाँ:
- w = मुक्त पदार्थ का द्रव्यमान (ग्राम में)
- I = धारा (एम्पियर में), t = समय (सेकंड में)
- Z = रासायनिक तुल्यांक (Electrochemical Equivalent)
2. फैराडे का द्वितीय नियम (Second Law):
जब विभिन्न वैद्युत अपघट्य विलयनों में श्रेणीक्रम में समान मात्रा में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो इलेक्ट्रोडों पर मुक्त पदार्थों के द्रव्यमान (w1, w2) उनके रासायनिक तुल्यांकी भारों (E1, E2) के समानुपाती होते हैं।
w1 / w2 = E1 / E2
1 फैराडे (F): 1 मोल इलेक्ट्रॉनों पर उपस्थित आवेश को 1 फैराडे कहते हैं।
1 F = 96500 कूलॉम (लगभग)
5. विद्युत रासायनिक सेल एवं गैल्वेनिक सेल (Electrochemical Cells)
वह युक्ति जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है, उसे विद्युत रासायनिक सेल या गैल्वेनिक/वोल्टीय सेल कहते हैं।
डैनियल सेल (Daniell Cell):
यह गैल्वेनिक सेल का सबसे प्रमुख उदाहरण है। इसमें जिंक (Zn) की छड़ ZnSO4 के विलयन में तथा कॉपर (Cu) की छड़ CuSO4 के विलयन में डूबी रहती है।
- एनोड (Anode): Zn इलेक्ट्रोड (ऋणात्मक ध्रुव) - इस पर ऑक्सीकरण (Oxidation) होता है।
Zn(s) → Zn2+(aq) + 2e- - कैथोड (Cathode): Cu इलेक्ट्रोड (धनात्मक ध्रुव) - इस पर अपचयन (Reduction) होता है।
Cu2+(aq) + 2e- → Cu(s) - कुल सेल अभिक्रिया:
Zn(s) + Cu2+(aq) → Zn2+(aq) + Cu(s)
ट्रिक: LOAN (Left, Oxidation, Anode, Negative)
लवण सेतु (Salt Bridge) का कार्य:
- यह दोनों अर्ध-सेलों के परिपथ को पूरा करता है।
- यह दोनों विलयनों की विद्युत उदासीनता (Electrical Neutrality) को बनाए रखता है।
6. मानक इलेक्ट्रोड विभव एवं नेर्नस्ट समीकरण (Nernst Equation)
मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE):
इसे संदर्भ इलेक्ट्रोड के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका मानक इलेक्ट्रोड विभव स्वेच्छा से **0.00 V** माना गया है।
नेर्नस्ट समीकरण (Nernst Equation):
किसी भी सांद्रता पर इलेक्ट्रोड विभव या सेल विभव (Ecell) की गणना करने के लिए नेर्नस्ट समीकरण का उपयोग किया जाता है:
Ecell = E°cell - (2.303 RT / nF) log [उत्पाद] / [अभिकारक]
298 K (25°C) ताप पर व्यंजक:
Ecell = E°cell - (0.0591 / n) log [Zn2+] / [Cu2+]
यहाँ:
- E°cell = मानक सेल विभव = E°cathode - E°anode
- n = स्थानांतरण हुए इलेक्ट्रॉनों की संख्या
7. व्यावसायिक सेल या बैटरियां (Commercial Cells & Batteries)
1. प्राथमिक सेल (Primary Cells):
इन्हें पुनरावेशित (Recharge) नहीं किया जा सकता। एक बार प्रयोग के बाद ये निष्क्रिय हो जाते हैं।
- शुष्क सेल (Leclanché Cell): घड़ी, टॉर्च में प्रयुक्त। (विभवांतर: 1.5 V)
- मरकरी सेल (Button Cell): सुनने की मशीनों व घड़ियों में। (विभवांतर: 1.35 V)
2. द्वितीयक सेल (Secondary Cells):
इन्हें बार-बार चार्ज (Recharge) करके प्रयोग किया जा सकता है।
- सीसा-संचायक सेल (Lead-Storage Battery): वाहनों और इनवर्टर में प्रयुक्त।
- एनोड: Spongy Lead (Pb)
- कैथोड: Lead Dioxide (PbO2)
- विद्युत अपघट्य: 38% H2SO4 का जलीय विलयन
- निकेल-कैडमियम सेल (Ni-Cd Cell): इसकी कार्यअवधि लंबी होती है परंतु यह महंगा होता है।
3. ईंधन सेल (Fuel Cells):
वे सेल जो ईंधन (जैसे- H2, CH4, CO) की दहन ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलते हैं।
- H2-O2 ईंधन सेल: अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम में विद्युत आपूर्ति एवं पीने के पानी हेतु प्रयोग किया गया था। इसकी दक्षता (~70%) अत्यधिक होती है और यह प्रदूषण मुक्त होता है।
8. संक्षारण (Corrosion)
वायुमंडल की नमी, ऑक्सीजन तथा अन्य गैसों की उपस्थिति में धातु की सतह का धीरे-धीरे नष्ट होना **संक्षारण** कहलाता है (जैसे- लोहे में जंग लगना, तांबे पर हरी परत जमना)।
जंग लगने की विद्युत रासायनिक क्रियाविधि:
- लोहे की सतह पर एक स्थान **एनोड** का कार्य करता है जहाँ लोहे का ऑक्सीकरण होता है:
Fe → Fe2+ + 2e- - दूसरा स्थान **कैथोड** का कार्य करता है जहाँ O2 और H+ का अपचयन होता है।
- जंग का रासायनिक सूत्र: Fe2O3 · xH2O (जलयोजित फेरिक ऑक्साइड)
संक्षारण से बचाव के उपाय:
- सतह पर पेंट, ग्रीस या तेल लगाना।
- यशदलेपन (Galvanization): लोहे पर जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाना।
- बलिदानी रक्षण (Sacrificial Protection) या कैथोडी रक्षण।
9. बिहार बोर्ड परीक्षा - अति महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (BSEB VVI Questions)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)
- 1 फैराडे (1 F) का मान कितने कूलॉम के बराबर होता है?
उत्तर: 96500 कूलॉम - तनुता बढ़ाने पर विशिष्ट चालकता (κ) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: विशिष्ट चालकता घटती है। - डैनियल सेल का मानक सेल विभव (E°cell) कितना होता है?
उत्तर: 1.10 V - लोहे में जंग लगने का रासायनिक सूत्र क्या है?
उत्तर: Fe2O3 · xH2O - सीसा संचायक बैटरी में किस अम्ल का उपयोग किया जाता है?
उत्तर: 38% सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4)
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: लवण सेतु (Salt Bridge) क्या है? इसके दो मुख्य कार्य लिखें।
उत्तर: लवण सेतु U-आकार की एक कांच की नली होती है जिसमें अक्रिय वैद्युत अपघट्य (जैसे- KCl, KNO3) का अगर-अगर जेल में बना विलयन भरा रहता है।
कार्य: 1. यह दोनों अर्ध-सेलों के परिपथ को पूर्ण करता है। 2. यह दोनों विलयनों की विद्युत उदासीनता को बनाए रखता है।
प्रश्न 2: फैराडे के विद्युत अपघटन का प्रथम नियम लिखिए।
उत्तर: विद्युत अपघटन की क्रिया में किसी इलेक्ट्रोड पर मुक्त हुए पदार्थ का द्रव्यमान (w) उसमें प्रवाहित विद्युत आवेश (Q) के समानुपाती होता है। (w = Z · I · t)
प्रश्न 3: प्राथमिक सेल और द्वितीयक सेल में दो मुख्य अंतर बताएं।
उत्तर:
- प्राथमिक सेल: इनमें रेडॉक्स अभिक्रिया केवल एक बार होती है और इन्हें पुनः चार्ज नहीं किया जा सकता (उदा. शुष्क सेल)।
- द्वितीयक सेल: इनमें अभिक्रियाएं उत्क्रमणीय होती हैं और इन्हें बाहरी स्रोत से विद्युत धारा देकर पुनः चार्ज किया जा सकता है (उदा. सीसा संचायक सेल)।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न: कोलराऊश का नियम क्या है? इसके दो मुख्य अनुप्रयोगों का वर्णन करें।
उत्तर:
कोलराऊश का नियम: इस नियम के अनुसार, अनंत तनुता पर किसी भी वैद्युत अपघट्य की मोलर चालकता उसके सभी धनायनों तथा ऋणायनों की सीमांत मोलर चालकताओं के योग के बराबर होती है।
Ξ°m = ν+ λ°+ + ν- λ°-
अनुप्रयोग:
1. दुर्बल वैद्युत अपघट्य की अनंत तनुता पर मोलर चालकता ज्ञात करना: दुर्बल वैद्युत अपघट्यों (जैसे CH3COOH) की सीमांत मोलर चालकता सीधे मापना संभव नहीं है। इसे प्रबल वैद्युत अपघट्यों (HCl, NaCl, CH3COONa) के मानों से निकाला जाता है:
Ξ°m(CH3COOH) = Ξ°m(CH3COONa) + Ξ°m(HCl) - Ξ°m(NaCl)
2. वियोजन की मात्रा (α) की गणना: किसी सांद्रता पर मोलर चालकता (Ξm) और सीमांत मोलर चालकता (Ξ°m) के अनुपात से वियोजन की मात्रा निकाली जाती है:
α = Ξm / Ξ°m
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